सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं
*ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ*🌹🙏🌹 #जय__श्री__राम_( Vnita kasnia punjab)🌹🙏🌹🙏🙏#जय__जय__सिया__राम_🙏🙏⛳⛳#जय_पवनपुत्र_हनुमान_ ⛳⛳ *🛕राम राम🚩राम राम🛕* *🛕││राम││🛕* *🛕राम🛕* * 🛕*🌞जय श्री सीताराम सादर सुप्रभात जी🌞🙏🙏जय श्री शनिदेवाय नमः🙏🙏🙏🌹 पिप्पलाद शनिदेव की धार्मिक कथा 🌹🙏✒✒🙏💕🙏💕🙏💕🙏श्मशान में जब महर्षि दधीचि के मांसपिंड कादाह संस्कार हो रहा था तो उनकी पत्नीअपने पति का वियोग सहन नहीं कर पायींऔर पास में ही स्थित विशाल पीपल वृक्ष केकोटर में 3 वर्ष के बालक को रखस्वयम् चिता में बैठकर सती हो गयीं।🙏💕🙏💕🙏💕🙏इस प्रकार महर्षि दधीचि और उनकी पत्नी काबलिदान हो गया किन्तु पीपल के कोटर में रखाबालक भूख प्यास से तड़प तड़प कर चिल्लाने लगा।जब कोई वस्तु नहीं मिली तो कोटर मेंगिरे पीपल के गोदों(फल) को खाकर बड़ा होने लगा।कालान्तर में पीपल के पत्तों और फलों कोखाकर बालक का जीवनयेन केन प्रकारेण सुरक्षित रहा।🙏💕🙏💕🙏💕🙏एक दिन देवर्षि नारद वहाँ से गुजरे।नारद ने पीपल के कोटर में बालक कोदेखकर उसका परिचय पूंछा-नारद- बालक तुम कौन हो ?बालक- यही तो मैं भी जानना चाहता हूँ ।नारद- तुम्हारे जनक कौन हैं ?बालक- यही तो मैं जानना चाहता हूँ ।🙏💕🙏💕🙏💕🙏तब नारद ने ध्यान धर देखा।नारद ने आश्चर्यचकित हो बताया किहे बालक ! तुम महान दानी महर्षि दधीचि के पुत्र हो।तुम्हारे पिता की अस्थियों का वज्र बनाकर हीदेवताओं ने असुरों पर विजय पायी थी।नारद ने बताया कि तुम्हारे पिता दधीचि कीमृत्यु मात्र 31 वर्ष की वय में ही हो गयी थी।🙏💕🙏💕🙏💕🙏बालक- मेरे पिता की अकाल मृत्यु का कारण क्या था ?नारद- तुम्हारे पिता पर शनिदेव की महादशा थी।बालक- मेरे ऊपर आयी विपत्ति का कारण क्या था ?नारद- शनिदेव की महादशा।🙏💕🙏💕🙏💕🙏इतना बताकर देवर्षि नारद ने पीपल के पत्तों औरगोदों को खाकर जीने वाले बालक कानाम पिप्पलाद रखा और उसे दीक्षित किया।नारद के जाने के बाद बालक पिप्पलाद नेनारद के बताए अनुसार ब्रह्मा जी कीघोर तपस्या कर उन्हें प्रसन्न किया।ब्रह्मा जी ने जब बालक पिप्पलाद सेवर मांगने को कहा तो पिप्पलाद नेअपनी दृष्टि मात्र से किसी भीवस्तु को जलाने की शक्ति माँगी।🙏💕🙏💕🙏💕🙏ब्रह्मा जी से वर मिलने पर सर्वप्रथम पिप्पलाद नेशनि देव का आह्वाहन कर अपने सम्मुख प्रस्तुत कियाऔर सामने पाकर आँखे खोलकरभष्म करना शुरू कर दिया।शनिदेव सशरीर जलने लगे।ब्रह्मांड में कोलाहल मच गया।सूर्यपुत्र शनि की रक्षा में सारे देव विफल हो गए।🙏💕🙏💕🙏💕🙏सूर्य भी अपनी आंखों के सामनेअपने पुत्र को जलता हुआ देखकर ब्रह्मा जी सेबचाने हेतु विनय करने लगे।अन्ततः ब्रह्मा जी स्वयम् पिप्पलाद केसम्मुख पधारे और शनिदेव को छोड़ने की बात कहीकिन्तु पिप्पलाद तैयार नहीं हुए।ब्रह्मा जी ने एक के बदले दो वर मांगने की बात कही।तब पिप्पलाद ने खुश होकर निम्नवत दो वरदान मांगे-🙏💕🙏💕🙏💕🙏1- जन्म से 5 वर्ष तक किसी भी बालक कीकुंडली में शनि का स्थान नहीं होगा।जिससे कोई और बालक मेरे जैसा अनाथ न हो।2- मुझ अनाथ को शरण पीपल वृक्ष ने दी है।अतः जो भी व्यक्ति सूर्योदय के पूर्व पीपल वृक्ष परजल चढ़ाएगा उसपर शनि कीमहादशा का असर नहीं होगा।🙏💕🙏💕🙏💕🙏ब्रह्मा जी ने तथास्तु कह वरदान दिया।तब पिप्पलाद ने जलते हुए शनि कोअपने ब्रह्मदण्ड से उनके पैरों परआघात करके उन्हें मुक्त कर दिया ।जिससे शनिदेव के पैर क्षतिग्रस्त हो गए औरवे पहले जैसी तेजी से चलने लायक नहीं रहे।अतः तभी से शनि "शनै:चरति य: शनैश्चर:"अर्थात जो धीरे चलता है वही शनैश्चर है, कहलायेऔर शनि आग में जलने के कारणकाली काया वाले अंग भंग रूप में हो गए।🙏💕🙏💕🙏💕🙏सम्प्रति शनि की काली मूर्ति औरपीपल वृक्ष की पूजा का यही धार्मिक हेतु है।आगे चलकर पिप्पलाद नेप्रश्न उपनिषद की रचना की,जो आज भी ज्ञान का वृहद भंडार है🙏💕🙏💕🙏💕🙏┈┉┅━❀꧁🙏"जय श्री राम"🙏 ꧂❀━┅┉┈*ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ*🙏🙏*सभी भक्त प्रेम से बोलो*✍️ 🙏"जय श्री राम रामाय नमः 🙏⛳🙏#जय_जय_सिया_राम__🙏⛳🙏#सियावर_रामचन्द्र__की__जय#🙏*ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ*
टिप्पणियाँ