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मान्यता है कि दशहरे के दिन ही प्रभु श्रीराम ने रावण का संहार किया था, इसलिए इस दिन को विजयदशमी भी कहा जाता है।📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍*बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम संगरिया की टीम की तरफ से सभी को दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएं*📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍: बुराई पर अच्छाई की जीत को दर्शाता है दशहरा शारदीय नवरात्रि के नौ दिन समाप्त होने के बाद दसवें दिन दशहरा मनाया जाता है। दशहरा का यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत के तौर पर मनाया जाता है। इस दिन भक्त मां दुर्गा की मूर्तियों का विसर्जन करते हैं। हिंदू पंचांग के मुताबिक आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दसवीं तिथि को दशहरा मनाया जाता है। मान्यता है कि दशहरे के दिन ही प्रभु श्रीराम ने रावण का संहार किया था, इसलिए इस दिन को विजयादशमी भी कहा जाता है। इस साल 15 अक्टूबर को यह त्योहार मनाया जाएगा।📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍दशहरे के दिन जगह-जगह पर मेले का आयोजन होता है, साथ ही रावण, मेघनाथ और कुंभकरण के पुतले फूंके जाते हैं। असत्य पर सत्य की जीत के इस प्रतीक के दिन लोग अपने मित्रों, परिजनों और रिश्तेदारों को संदेश भेजकर शुभकामनाएं देते हैं। आप भी इन संदेशों के जरिए अपने परिजनों को विश कर सकते हैं-📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍1- बुराई का होता है विनाश,दशहरा लाता है उम्मीद की आस।रावण की तरह आपके दुखों का हो नाश,विजयदशमी की हार्दिक शुभकामनाएं📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍2- संकटों का तम घनेरा,हो न आकुल मन ये तेरा।संकटों के तम छटेंगे होगा फिर सुंदर सवेरा,मुबारक हो आपको दशहरा।📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍3- रावण की तरहमन के विकारों का नाश हो,प्रभु श्रीराम का हृदय मेंसर्वदा वास हो।📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍4- ज्योत से ज्योत जगाते चलोप्रेम की गंगा बहाते चलोराह में आए जो दीन दुखीसबको गले लगाते चलोदिन आएगा सबका सुनहरामेरी तरफ से शुभ दशहरा📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍5- कभी भी आप पर पड़े न दुख का साया,प्रभु राम की कृपा का ऐसा असर रहे छाया,हरदम धन धान्य रहे आप अंगना,इस विजयादशमी यही है हमारी मनोकामना।शुभ विजयादशमी📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍फूलों की खुशबू अपनों का प्यार, मुबारक हो आपको विजयादशमी का त्योहार…चांद की चांदनी शरद की बहार,फूलों की खुशबू अपनों का प्यार,मुबारक हो आपको विजयादशमी का त्योहार,सदा खुश रहे आप और आपका परिवार📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍दे बेशुमार खुशियां यह दशहरा आपको, हर प्यारी खुशी आपकी दीवानी हो जाए!आज की नई सुबह बेहद सुहानी हो जाए,दुखों की सारी कड़वाहट पुरानी हो जाए,दे बेशुमार खुशियां यह दशहरा आपको,हर प्यारी खुशी आपकी दीवानी हो जाए!📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍खुशी आप के कदम चूमे, कभी ना हो दुखों का सामना…खुशी आप के कदम चूमे,कभी ना हो दुखों का सामना…धन ही धन आए आपके आंगन में,दशहरा के शुभ अवसर पर हमारी है यही मनोकामना,विजयदशमी की ढ़ेर सारी शुभकामनाएं!📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍हैप्पी दशहरा 2021आपके जीवन में कभी-भी कोई गम ना आएआपको दशहरा की ढ़ेर सारी शुभकामनाएं,हैप्पी दशहरा 2021📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍अत्याचार मिटाने के लिए अब हर घर से एक राम निकलेगाअन्याय के रूप में अब नेताओं का भ्रष्टाचार हैरावण के रूप में नेताओं का अत्याचार हैभ्रष्टाचार और अत्याचार मिटाने के लिए शंख बजेगाअब हर घर से एक राम निकलेगामंगलमय हो दशहरा।📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍दशहरा के पावन पर्व की शुभकामनाएं!दशहरा एक उम्मीद जगाता है,बुराई के अंत की याद दिलाता है,जो चलता है सत्य की राह परवो विजय का प्रतीक बन जाता हैंदशहरा के पावन पर्व की शुभकामनाएं!📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएंसत्य स्थापित करके, इस देश से बुराई को मिटाना होगा,आतंकी रावण का दहन करने आज फिर राम को आना होगा,आपको पूरे परिवार सहित दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएं।📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍अधर्म पर धर्म की जीत का त्‍योहार है दशहराअधर्म पर धर्म की जीत,अन्याय पर न्याय की विजय,असत्य पर सत्य की जीत,बुराई पर अच्छाई की जय जयकार,यही है दशहरा का त्योहार।📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍आपको दशहरा की कोटि-कोटि बधाईइस दशहरा प्रण लेना होगा,रावण नहीं राम बनकर रहना होगा,बुराई के खिलाफ आवाज उठाना होगा,हर बच्ची को आज दुर्गा बनाना होगा।📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍दशहरा की शुभकामना व बधाई संदेशबुराई का होता है विनाश,दशहरा लाता है उम्मीद की आस,रावण की तरह आपके दुखों का हो नाश,सफलता और तरक्की के साथ यह दशहरा हो खास।📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍विजय दशमी की यूं दें बधाइयांभीतर के रावण को जो आग खुद लगाएंगेसही मायने में वे ही दशहरा मनाएंगे..!शुभ विजयादशमी.📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍यही है दशहरे के शुभ अवसर पर मनोकामना…खुशी आप के कदम चूमे,कभी ना हो दुखों का सामना,धन ही धन आए आप के अंगना,यही है दशहरे के शुभ अवसर पर मनोकामना।आप सभी को दशहरे की हार्दिक शुभकामनाएं📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍इससे पहले कि दशहरा की शाम हो जाए…इससे पहले कि दशहरा की शाम हो जाए,मेरा SMS औरों की तरह आम हो जाए,सारे Mobile Network जाम हो जाएं और दशहरा विश करना आम हो जाए… हैप्पी दशहरा आपको.📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍भीतर के रावण को जो आग खुद लगाएंगे…भीतर के रावण को जो आग खुद लगाएंगेसही मायने में वे ही दशहरा मनाएंगे..!शुभ विजयादशमी.📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍बुराई पर अच्छाई की जीत का समय…उत्सव का एक समय,बुराई पर अच्छाई की जीत का समय,एक समय जब दुनिया अच्छाई की शक्ति का उदाहरण देखती है,आइए हम उसी सच्ची भावना को जारी रखेंहैप्पी दशहरा.📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍रावण जलाओ, बुराई को आग लगाओ…रावण जलाओ,बुराई को आग लगाओ,अच्छाई को अपनाओ,हैप्पी दशहरा📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍विजयादशमी पर विजय का प्रतीक हैं श्रीरामविजयादशमी पर विजय का प्रतीक हैं श्रीरामबुराई पर अच्छाई का प्रतीक हैं श्री रामदशहरा की हार्दिक शुभकामनाएं📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍सफलता और तरक्की के साथ यह दशहरा हो खास…बुराई का होता है विनाश,दशहरा लाता है उम्मीद की आस,रावण की तरह आपके दुखों का हो नाश,सफलता और तरक्की के साथ यह दशहरा हो खास।📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍तहे दिल से कह रहा हूं हैप्पी दशहरा 2021आपकी जीवन में हो खुशियों का बसेरातहे दिल से कह रहा हूं हैप्पी दशहरा 2021📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍आयो मिलकर दशहरा मनाएं…आयो मिलकर दशहरा मनाएंअपने अंहकार रूपी रावण को जलाएंहैप्पी दशहरा📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍दशहरा का पर्व है अच्छाई का प्रतीक…दशहरा का पर्व है अच्छाई का प्रतीकबुराई की राह पर चलकर हार है निश्चितइस संदेश को करो अपने जीवन में शामिलदशहरा पर्व की शुभकामनाएं📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍बुरे पर अच्छे की जय जयकार…धर्म पर धर्म की जीत, अन्याय पर न्याय की विजयबुरे पर अच्छे की जय जयकार, यही है दशहरा का त्योहार।👭👭👭👭👭👭👭👭👭👭👭इस दशहरे हर मनुष्य बस एक नेक काम करें…इस दशहरे हर मनुष्य बस एक नेक काम करेंअंतर्मन में पनप रही हर बुराई का सर्वनाश करेंइसी कामना के साथ आपको दशहरे की शुभकामनाएं📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍 14 Oct 2021आपको पूरे परिवार सहित दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएंसत्य स्थापित करके, इस देश से बुराई को मिटाना होगाआतंकी रावण का दहन करने आज फिर राम को आना होगाआपको पूरे परिवार सहित दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएं📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍आपको दशहरा की ढेरों सारी शुभ कामनाएं…आपके जीवन में कभी-भी कोई गम ना आएआपको दशहरा की ढेरों सारी शुभ कामनाएं📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍Happy Dussehra 2021 Wishes: दशहरा पर्व की हार्दिक शुभकामनाएंइससे पहले की दशहरे की शाम हो जाए,मेरा मैसेज औरों की तरह आम हो जाए,सारे मोबाइल नेटवर्क जाम हो जाएं,और दशहरा विश करना आम हो जाए📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍*बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम की अध्यक्ष श्रीमती वनिता कासनियां पंजाब*आप सभी को Happy Vijayadashamतीन लोग आपका नंबर मांग रहे हैं, मैंने नहीं दिया.वो दशहरा के दिन आयेंगे उनके नाम हैं…सुख..!!शांति..!!समृधि..!!हैप्पी विजयदशमी।विजयदशमी पर विजय का प्रतीक हैं श्रीरामबुराई पर अच्छाई का प्रतीक हैं श्री रामदशहरा की हार्दिक शुभकामनाएं📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍

मान्यता है कि दशहरे के दिन ही प्रभु श्रीराम ने रावण का संहार किया था, इसलिए इस दिन को विजयदशमी भी कहा जाता है।
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*बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम संगरिया की टीम की तरफ से सभी को दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएं*
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: बुराई पर अच्छाई की जीत को दर्शाता है दशहरा शारदीय नवरात्रि के नौ दिन समाप्त होने के बाद दसवें दिन दशहरा मनाया जाता है। दशहरा का यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत के तौर पर मनाया जाता है। इस दिन भक्त मां दुर्गा की मूर्तियों का विसर्जन करते हैं। हिंदू पंचांग के मुताबिक आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दसवीं तिथि को दशहरा मनाया जाता है। मान्यता है कि दशहरे के दिन ही प्रभु श्रीराम ने रावण का संहार किया था, इसलिए इस दिन को विजयादशमी भी कहा जाता है। इस साल 15 अक्टूबर को यह त्योहार मनाया जाएगा।
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दशहरे के दिन जगह-जगह पर मेले का आयोजन होता है, साथ ही रावण, मेघनाथ और कुंभकरण के पुतले फूंके जाते हैं। असत्य पर सत्य की जीत के इस प्रतीक के दिन लोग अपने मित्रों, परिजनों और रिश्तेदारों को संदेश भेजकर शुभकामनाएं देते हैं। आप भी इन संदेशों के जरिए अपने परिजनों को विश कर सकते हैं-
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1- बुराई का होता है विनाश,
दशहरा लाता है उम्मीद की आस।
रावण की तरह आपके दुखों का हो नाश,
विजयदशमी की हार्दिक शुभकामनाएं
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2- संकटों का तम घनेरा,
हो न आकुल मन ये तेरा।
संकटों के तम छटेंगे होगा फिर सुंदर सवेरा,
मुबारक हो आपको दशहरा।
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3- रावण की तरह
मन के विकारों का नाश हो,
प्रभु श्रीराम का हृदय में
सर्वदा वास हो।
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4- ज्योत से ज्योत जगाते चलो
प्रेम की गंगा बहाते चलो
राह में आए जो दीन दुखी
सबको गले लगाते चलो
दिन आएगा सबका सुनहरा
मेरी तरफ से शुभ दशहरा
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5- कभी भी आप पर पड़े न दुख का साया,
प्रभु राम की कृपा का ऐसा असर रहे छाया,
हरदम धन धान्य रहे आप अंगना,
इस विजयादशमी यही है हमारी मनोकामना।
शुभ विजयादशमी
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फूलों की खुशबू अपनों का प्यार, मुबारक हो आपको विजयादशमी का त्योहार…
चांद की चांदनी शरद की बहार,

फूलों की खुशबू अपनों का प्यार,

मुबारक हो आपको विजयादशमी का त्योहार,

सदा खुश रहे आप और आपका परिवार
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दे बेशुमार खुशियां यह दशहरा आपको, हर प्यारी खुशी आपकी दीवानी हो जाए!
आज की नई सुबह बेहद सुहानी हो जाए,

दुखों की सारी कड़वाहट पुरानी हो जाए,

दे बेशुमार खुशियां यह दशहरा आपको,

हर प्यारी खुशी आपकी दीवानी हो जाए!

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खुशी आप के कदम चूमे, कभी ना हो दुखों का सामना…
खुशी आप के कदम चूमे,

कभी ना हो दुखों का सामना…

धन ही धन आए आपके आंगन में,

दशहरा के शुभ अवसर पर हमारी है यही मनोकामना,

विजयदशमी की ढ़ेर सारी शुभकामनाएं!

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हैप्पी दशहरा 2021
आपके जीवन में कभी-भी कोई गम ना आए

आपको दशहरा की ढ़ेर सारी शुभकामनाएं,

हैप्पी दशहरा 2021

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अत्याचार मिटाने के लिए अब हर घर से एक राम निकलेगा

अन्याय के रूप में अब नेताओं का भ्रष्टाचार है

रावण के रूप में नेताओं का अत्याचार है

भ्रष्टाचार और अत्याचार मिटाने के लिए शंख बजेगा

अब हर घर से एक राम निकलेगा

मंगलमय हो दशहरा।

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दशहरा के पावन पर्व की शुभकामनाएं!
दशहरा एक उम्मीद जगाता है,

बुराई के अंत की याद दिलाता है,

जो चलता है सत्य की राह पर

वो विजय का प्रतीक बन जाता हैं

दशहरा के पावन पर्व की शुभकामनाएं!

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दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएं

सत्य स्थापित करके, इस देश से बुराई को मिटाना होगा,

आतंकी रावण का दहन करने आज फिर राम को आना होगा,

आपको पूरे परिवार सहित दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएं।

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अधर्म पर धर्म की जीत का त्‍योहार है दशहरा

अधर्म पर धर्म की जीत,

अन्याय पर न्याय की विजय,

असत्य पर सत्य की जीत,

बुराई पर अच्छाई की जय जयकार,

यही है दशहरा का त्योहार।
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आपको दशहरा की कोटि-कोटि बधाई

इस दशहरा प्रण लेना होगा,

रावण नहीं राम बनकर रहना होगा,

बुराई के खिलाफ आवाज उठाना होगा,

हर बच्ची को आज दुर्गा बनाना होगा।

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दशहरा की शुभकामना व बधाई संदेश

बुराई का होता है विनाश,

दशहरा लाता है उम्मीद की आस,

रावण की तरह आपके दुखों का हो नाश,

सफलता और तरक्की के साथ यह दशहरा हो खास।

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विजय दशमी की यूं दें बधाइयां
भीतर के रावण को जो आग खुद लगाएंगे

सही मायने में वे ही दशहरा मनाएंगे..!

शुभ विजयादशमी.

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यही है दशहरे के शुभ अवसर पर मनोकामना…
खुशी आप के कदम चूमे,

कभी ना हो दुखों का सामना,

धन ही धन आए आप के अंगना,

यही है दशहरे के शुभ अवसर पर मनोकामना।

आप सभी को दशहरे की हार्दिक शुभकामनाएं

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इससे पहले कि दशहरा की शाम हो जाए…
इससे पहले कि दशहरा की शाम हो जाए,

मेरा SMS औरों की तरह आम हो जाए,

सारे Mobile Network जाम हो जाएं और दशहरा विश करना आम हो जाए… हैप्पी दशहरा आपको.

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भीतर के रावण को जो आग खुद लगाएंगे…
भीतर के रावण को जो आग खुद लगाएंगे

सही मायने में वे ही दशहरा मनाएंगे..!

शुभ विजयादशमी.

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बुराई पर अच्छाई की जीत का समय…
उत्सव का एक समय,

बुराई पर अच्छाई की जीत का समय,

एक समय जब दुनिया अच्छाई की शक्ति का उदाहरण देखती है,

आइए हम उसी सच्ची भावना को जारी रखें

हैप्पी दशहरा.

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रावण जलाओ, बुराई को आग लगाओ…
रावण जलाओ,

बुराई को आग लगाओ,

अच्छाई को अपनाओ,

हैप्पी दशहरा
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विजयादशमी पर विजय का प्रतीक हैं श्रीराम
विजयादशमी पर विजय का प्रतीक हैं श्रीराम

बुराई पर अच्छाई का प्रतीक हैं श्री राम

दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएं

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सफलता और तरक्की के साथ यह दशहरा हो खास…
बुराई का होता है विनाश,

दशहरा लाता है उम्मीद की आस,

रावण की तरह आपके दुखों का हो नाश,

सफलता और तरक्की के साथ यह दशहरा हो खास।

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तहे दिल से कह रहा हूं हैप्पी दशहरा 2021
आपकी जीवन में हो खुशियों का बसेरा

तहे दिल से कह रहा हूं हैप्पी दशहरा 2021
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आयो मिलकर दशहरा मनाएं…
आयो मिलकर दशहरा मनाएं
अपने अंहकार रूपी रावण को जलाएं
हैप्पी दशहरा

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दशहरा का पर्व है अच्छाई का प्रतीक…
दशहरा का पर्व है अच्छाई का प्रतीक

बुराई की राह पर चलकर हार है निश्चित

इस संदेश को करो अपने जीवन में शामिल

दशहरा पर्व की शुभकामनाएं
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बुरे पर अच्छे की जय जयकार…
धर्म पर धर्म की जीत, अन्याय पर न्याय की विजय

बुरे पर अच्छे की जय जयकार, यही है दशहरा का त्योहार।
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इस दशहरे हर मनुष्य बस एक नेक काम करें…
इस दशहरे हर मनुष्य बस एक नेक काम करें

अंतर्मन में पनप रही हर बुराई का सर्वनाश करें

इसी कामना के साथ आपको दशहरे की शुभकामनाएं
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 14 Oct 2021
आपको पूरे परिवार सहित दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएं
सत्य स्थापित करके, इस देश से बुराई को मिटाना होगा
आतंकी रावण का दहन करने आज फिर राम को आना होगा
आपको पूरे परिवार सहित दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएं
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आपको दशहरा की ढेरों सारी शुभ कामनाएं…
आपके जीवन में कभी-भी कोई गम ना आए

आपको दशहरा की ढेरों सारी शुभ कामनाएं
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Happy Dussehra 2021 Wishes: दशहरा पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं
इससे पहले की दशहरे की शाम हो जाए,

मेरा मैसेज औरों की तरह आम हो जाए,

सारे मोबाइल नेटवर्क जाम हो जाएं,

और दशहरा विश करना आम हो जाए
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*बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम की अध्यक्ष श्रीमती वनिता कासनियां पंजाब*
आप सभी को Happy Vijayadasham
तीन लोग आपका नंबर मांग रहे हैं, मैंने नहीं दिया.
वो दशहरा के दिन आयेंगे उनके नाम हैं…

सुख..!!

शांति..!!

समृधि..!!

हैप्पी विजयदशमी।

विजयदशमी पर विजय का प्रतीक हैं श्रीराम

बुराई पर अच्छाई का प्रतीक हैं श्री राम

दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएं
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उसका शरीर बहुत विशाल था। उसकी शक्ति की भी कोई सीमा नहीं थी। जब उस विकट रूप में मोहासुर देवताओं के सामने पहुंचा तो वे भयभीत हो गए। तब देवताओं की रक्षा के लिए श्रीगणेश ने "महोदर" अवतार लिया। उस रूप में उनका उदर अर्थात पेट इतना बड़ा था कि उसने आकाश को आच्छादित कर दिया। जब वे मोहासुर के समक्ष पहुंचे तो उनका वो अद्भुत रूप देख कर मोहासुर ने बिना युद्ध के ही आत्मसमर्पण कर दिया। उसके बाद उसने देव महोदर को ही अपना इष्ट बना लिया।विकट: जालंधर और वृंदा की कथा तो हम सभी जानते हैं। जब श्रीहरि ने जालंधर के विनाश हेतु उसकी पत्नी वृंदा का सतीत्व भंग किया तो महादेव ने जालंधर का वध कर दिया। तत्पश्चात वृंदा ने आत्मदाह कर लिया और उन्ही के क्रोध से कामासुर का एक महापराक्रमी दैत्य उत्पन्न हुआ। उसने महादेव से कई अवतार प्राप्त कर त्रिलोक पर अधिकार जमा लिया। त्रिलोक को त्रस्त जान कर श्रीगणेश ने "विकट" रूप में अवतार लिया और अपने उस अवतार में उन्होंने अपने बड़े भाई कार्तिकेय के मयूर को अपना वाहन बनाया। उसके बाद उन्होंने कामासुर को घोर युद्ध कर उसे पराजित किया और देवताओं को निष्कंटक किया। बाद में कामासुर श्रीगणेश का भक्त बन गया। गजानन: एक बार धनपति कुबेर को अपने धन पर अहंकार और लोभ हो गया। उनके लोभ से लोभासुर नाम के असुर का जन्म हुआ। मार्गदर्शन के लिए वो शुक्राचार्य की शरण में गया। शुक्राचार्य ने उसे महादेव की तपस्या करने का आदेश दिया। उसने भोलेनाथ की घोर तपस्या की जिसके बाद महादेव ने उसे त्रिलोक विजय का वरदान दे दिया। उस वरदान के मद में लोभासुर स्वर्ग, पृथ्वी और पाताल का अधिपति हो गया। सारे देवता स्वर्ग से हाथ धोकर अपने गुरु बृहस्पति के पास गए। देवगुरु ने उन्हें श्रीगणेश की तपस्या करने को कहा। देवराज इंद्र के साथ सभी देवों ने श्रीगणेश की तपस्या की जिससे श्रीगणेश प्रसन्न हुए और उन्होंने देवताओं को आश्वासन दिया कि वे अवश्य उनका उद्धार करेंगे। गणेशजी "गजानन" रूप में पृथ्वी पर आये और अपने मूषक द्वारा लोभासुर को युद्ध का सन्देश भेजा। जब शुक्राचार्य ने जाना कि गजानन स्वयं आये हैं तो लोभासुर की पराजय निश्चित जान कर उन्होंने उसे श्रीगणेश की शरण में जाने का उपदेश दिया। अपनी गुरु की बात सुनकर लोभासुर ने बिना युद्ध किए ही अपनी पराजय स्वीकार कर ली और उनका भक्त बन गया।लंबोदर: क्रोधासुर नाम नाम का एक दैत्य था जो अजेय बनना चाहता था। उसने इसी इच्छा से भगवान सूर्यनारायण की तपस्या की और उनसे ब्रह्माण्ड विजय का वरदान प्राप्त कर लिया। वरदान प्राप्त करने के बाद क्रोधासुर विश्वविजय के अभियान पर निकला। उसे स्वर्ग की ओर आते देख इंद्र और सभी देवता भयभीत हो गए। उन्होंने श्रीगणेश से प्रार्थना की कि वो किसी भी प्रकार क्रोधासुर को स्वर्ग पहुँचने से रोकें। तब वे "लम्बोदर" का रूप लेकर क्रोधासुर के पास आये और उसे समझाया कि वो कभी भी अजेय नहीं बन सकता। इस पर क्रोधासुर उनकी बात ना मान कर स्वर्ग की ओर बढ़ने लगा। ये देख कर श्रीगणेश ने अपने उदर (पेट) द्वारा उस मार्ग को बंद कर दिया। ये देख कर क्रोधासुर दूसरे मार्ग की ओर मुड़ा। तब लम्बोदर रुपी श्रीगणेश ने अपने उदर को विस्तृत कर वो मार्ग भी रुद्ध कर दिया। क्रोधासुर जिस भी मार्ग पर जाता, श्रीगणेश अपने उदर से उस मार्ग को बंद कर देते। ये देख कर क्रोधासुर का अभिमान समाप्त हुआ और वो श्रीगणेश का भक्त बन गया। उनके आदेश पर उसने अपना युद्ध अभियान बंद कर दिया और पाताल में जाकर बस गया।विघ्नराज: एक बार माता पार्वती कैलाश पर अपनी सखियों के साथ बातचीत कर रही थी। उसी दौरान वे जोर से हंस पड़ीं। उनकी हंसी से एक विशाल पुरुष की उत्पत्ति हुई। चूँकि उसका जन्म माता पार्वती के ममता भाव से हुआ था इसीलिए उन्होंने उसका नाम मम रखा। बाद में मम देवी पार्वती की आज्ञा से वन में तपस्या करने चला गया। वही वो असुरराज शंबरासुर से मिला। उसे योग्य जान कर शम्बरासुर ने उसे कई प्रकार की आसुरी शक्तियां सिखा दीं। बाद में शम्बरासुर ने मम को श्री गणेश की उपासना करने को कहा। मम ने गणपति को प्रसन्न कर अपार शक्ति का स्वामी बन गया। तप पूर्ण होने के बाद शम्बरासुर ने उसका विवाह अपनी पुत्री मोहिनी के साथ कर दिया। जब दैत्यगुरु शुक्राचार्य ने मम के तप के बारे में सुना तो उन्होंने उसे दैत्यराज के पद पर विभूषित कर दिया। अपने बल के मद में आकर ममासुर ने देवताओं पर आक्रमण किया और उन्हें परास्त कर कारागार में डाल दिया। तब उसी कारावास में देवताओं ने गणेश की उपासना की जिससे प्रसन्न हो श्रीगणेश "विघ्नराज" (विघ्नेश्वर) के रूप में अवतरित हुए। उन्होंने ममासुर को युद्ध के लिए ललकारा और उसे परास्त कर उसका मान मर्दन किया। अंततः ममासुर उनकी शरण में आ गया। तत्पश्चात उन्होंने देवताओं को मुक्त कर उनके विघ्न का नाश किया। धूम्रवर्ण: एक बार भगवान सूर्यनारायण को छींक आ गई और उनकी छींक से एक दैत्य की उत्पत्ति हुई। उस दैत्य का नाम उन्होंने अहम रखा। उसने दैत्यगुरु शुक्राचार्य से शिक्षा ली और अहंतासुर नाम से प्रसिद्ध हुआ। बाद में उसने अपना स्वयं का राज्य बसाया और तप कर श्रीगणेश को प्रसन्न किया। उनसे उसे अनेकानेक वरदान प्राप्त हुए। वरदान प्राप्त कर वो निरंकुश हो गया और बहुत अत्याचार और अनाचार फैलाया। तब उसे रोकने के लिए श्री गणेश ने धुंए के रंग वाले रूप में अवतार लिया और उसी कारण उनका नाम "धूम्रवर्ण" पड़ा। उनके हाथ में एक दुर्जय पाश था जिससे सदैव ज्वालाएं निकलती रहती थीं। धूम्रवर्ण के रुप में गणेश जी ने अहंतासुर को उस पाश से जकड लिया। अहम् ने उस पाश से छूटने का बड़ा प्रयास किया किन्तु सफल नहीं हुआ। अंत में उसने अपनी पराजय स्वीकार कर ली और देव धूम्रवर्ण की शरण में आ गया। तब उन्होंने अहंतासुर को अपनी अनंत भक्ति प्रदान की।

राष्ट्र हिंदू धर्म में श्रीगणेश के अवतार By  वनिता कासनियां पंजाब हम सबने भगवान विष्णु के  दशावतार  और  भगवान शंकर के १९ अवतारों  के विषय में सुना है। किन्तु क्या आपको श्रीगणेश के अवतारों के विषय में पता है? वैसे तो श्रीगणेश के कई रूप और अवतार हैं किन्तु उनमें से आठ अवतार जिसे  "अष्टरूप"  कहते हैं, वो अधिक प्रसिद्ध हैं। इन आठ अवतारों की सबसे बड़ी विशेषता ये है कि इन्ही सभी अवतारों में श्रीगणेश ने अपने शत्रुओं का वध नहीं किया बल्कि उनके प्रताप से वे सभी स्वतः उनके भक्त हो गए। आइये उसके विषय में कुछ जानते हैं। वक्रतुंड:  मत्स्यरासुर नामक एक राक्षस था जो महादेव का बड़ा भक्त था। उसने भगवान शंकर की तपस्या कर ये वरदान प्राप्त किया कि उसे किसी का भय ना हो। वरदान पाने के बाद मत्सरासुर ने देवताओं को प्रताडि़त करना शुरू कर दिया। उसके दो पुत्र थे - सुंदरप्रिय और विषयप्रिय जो अपने पिता के समान ही अत्याचारी थे। उनके अत्याचार से तंग आकर सभी देवता महादेव की शरण में पहुंचे। शिवजी ने उन्हें श्रीगणेश का आह्वान करने को कहा। देवताओं की आराधना पर श्रीगणेश ने विकट सूंड व...

*विधि का विधान*भगवान श्री राम जी का विवाह और राज्याभिषेक दोनों शुभ मुहूर्त देख कर ही किया गया था, फिर भी ना वैवाहिक जीवन सफल हुआ और ना ही राज्याभिषेक।और मुनि वशिष्ठ जी ने तो साफ कह दिया-*सुनहु भरत भावी प्रबल**बिलखि कहेहूं मुनिनाथ**हानि लाभ जीवन-मरण**यश-अपयश विधि हाथ*अर्थात, जो विधि ने निर्धारित किया है वही होकर रहेगा।*ना भगवान श्री राम जी के जीवन को बदला जा सका और ना ही भगवान श्री कृष्ण जी के। ना ही भगवान शिव, सती की मृत्यु को टाल सके,* जबकि महामृत्युंजय मंत्र उन्हीं का आह्वान करता है।*ना श्री #गुरु #अर्जुन देव जी, ना श्री गुरु तेग बहादुर जी और ना ही दशमेश पिता श्री गुरू गोबिन्द सिंह जी अपने साथ होने वाले विधि के विधान को टाल सके, जबकि आप सब समर्थ थे।*#रामकृष्ण परमहंस जी भी अपने #कैंसर को ना टाल सके।ना रावण अपने जीवन को बदल पाया और ना ही #कंस, जबकि दोनों के पास समस्त #शक्तियां थीं।#वनिता #कासनियां #पंजाब द्वारा*मानव अपने जन्म के साथ ही #जीवन, मरण, यश, अपयश, लाभ, हानि, स्वास्थ्य, बीमारी, देह, रंग, परिवार, समाज, देश और स्थान सब पहले से ही निर्धारित करके आता है।**इसलिए सरल रहें, सहज रहें, मन कर्म और वचन से सद्कर्म में लीन रहें।*

*विधि का विधान* भगवान श्री राम जी का विवाह और राज्याभिषेक दोनों शुभ मुहूर्त देख कर ही किया गया था, फिर भी ना वैवाहिक जीवन सफल हुआ और ना ही राज्याभिषेक। और मुनि वशिष्ठ जी ने तो साफ कह दिया- *सुनहु भरत भावी प्रबल* *बिलखि कहेहूं मुनिनाथ* *हानि लाभ जीवन-मरण* *यश-अपयश विधि हाथ* अर्थात, जो विधि ने निर्धारित किया है वही होकर रहेगा। *ना भगवान श्री राम जी के जीवन को बदला जा सका और ना ही भगवान श्री कृष्ण जी के। ना ही भगवान शिव, सती की मृत्यु को टाल सके,* जबकि महामृत्युंजय मंत्र उन्हीं का आह्वान करता है। *ना श्री #गुरु #अर्जुन देव जी, ना श्री गुरु तेग बहादुर जी और ना ही दशमेश पिता श्री गुरू गोबिन्द सिंह जी अपने साथ होने वाले विधि के विधान को टाल सके, जबकि आप सब समर्थ थे।* #रामकृष्ण परमहंस जी भी अपने #कैंसर को ना टाल सके। ना रावण अपने जीवन को बदल पाया और ना ही #कंस, जबकि दोनों के पास समस्त #शक्तियां थीं। #वनिता #कासनियां #पंजाब द्वारा *मानव अपने जन्म के साथ ही #जीवन, मरण, यश, अपयश, लाभ, हानि, स्वास्थ्य, बीमारी, देह, रंग, परिवार, समाज, देश और स्थान सब पहले से ही निर्धारित करके आता है।* ...

राम राम जी

जब श्रीराम विभीषण से मिलने दोबारा लंका गए, तब उन्होंने रामसेतु का एक हिस्सा स्वयं ही क्यों तोड़ दिया था? By समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाब//          🌹🌹🙏🙏🌹🌹 वाल्मीकि रामायण के अनुसार श्री राम ने राम सेतु का निर्माण रावण के वध हेतु लंका जाने के लिए करवाया था। समुद्र पर बने इस पुल का निर्माण वानरों, रीछ और नल नील भाइयों की निगरानी में हुआ था। नल नील विश्वकर्मा के पुत्र थे और उस समय के महान वास्तुविद माने जाते थे। बहुत से लोगों को इसकी जानकारी नहीं है कि रामसेतु को भगवान श्री राम ने स्वयं तोड़ा था। पद्म पुराण के सृष्टि खंड में इसकी कथा विस्तारपूर्वक मिलती है। पदम पुराण के मुताबिक जब श्री राम रावण का वध करके लक्ष्मण और सीता के साथ अयोध्या लौट आए थे और उनका राज्याभिषेक हो गया था, तब एक दिन उनके मन में विभीषण से मिलने का विचार आया। उन्होंने सोचा कि रावण की मृत्यु के बाद विभीषण किस तरह लंका का शासन कर रहे हैं? क्या उन्हें कोई परेशानी तो नहीं! ऐसा विचार मन में आने के बाद जब श्री राम लंका जाने की सोच रहे थे, उसी समय वहां भरत भी आ गए। भरत के पूछने पर श्री राम ने उन्हे...