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मान्यता है कि दशहरे के दिन ही प्रभु श्रीराम ने रावण का संहार किया था, इसलिए इस दिन को विजयदशमी भी कहा जाता है।📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍*बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम संगरिया की टीम की तरफ से सभी को दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएं*📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍: बुराई पर अच्छाई की जीत को दर्शाता है दशहरा शारदीय नवरात्रि के नौ दिन समाप्त होने के बाद दसवें दिन दशहरा मनाया जाता है। दशहरा का यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत के तौर पर मनाया जाता है। इस दिन भक्त मां दुर्गा की मूर्तियों का विसर्जन करते हैं। हिंदू पंचांग के मुताबिक आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दसवीं तिथि को दशहरा मनाया जाता है। मान्यता है कि दशहरे के दिन ही प्रभु श्रीराम ने रावण का संहार किया था, इसलिए इस दिन को विजयादशमी भी कहा जाता है। इस साल 15 अक्टूबर को यह त्योहार मनाया जाएगा।📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍दशहरे के दिन जगह-जगह पर मेले का आयोजन होता है, साथ ही रावण, मेघनाथ और कुंभकरण के पुतले फूंके जाते हैं। असत्य पर सत्य की जीत के इस प्रतीक के दिन लोग अपने मित्रों, परिजनों और रिश्तेदारों को संदेश भेजकर शुभकामनाएं देते हैं। आप भी इन संदेशों के जरिए अपने परिजनों को विश कर सकते हैं-📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍1- बुराई का होता है विनाश,दशहरा लाता है उम्मीद की आस।रावण की तरह आपके दुखों का हो नाश,विजयदशमी की हार्दिक शुभकामनाएं📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍2- संकटों का तम घनेरा,हो न आकुल मन ये तेरा।संकटों के तम छटेंगे होगा फिर सुंदर सवेरा,मुबारक हो आपको दशहरा।📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍3- रावण की तरहमन के विकारों का नाश हो,प्रभु श्रीराम का हृदय मेंसर्वदा वास हो।📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍4- ज्योत से ज्योत जगाते चलोप्रेम की गंगा बहाते चलोराह में आए जो दीन दुखीसबको गले लगाते चलोदिन आएगा सबका सुनहरामेरी तरफ से शुभ दशहरा📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍5- कभी भी आप पर पड़े न दुख का साया,प्रभु राम की कृपा का ऐसा असर रहे छाया,हरदम धन धान्य रहे आप अंगना,इस विजयादशमी यही है हमारी मनोकामना।शुभ विजयादशमी📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍फूलों की खुशबू अपनों का प्यार, मुबारक हो आपको विजयादशमी का त्योहार…चांद की चांदनी शरद की बहार,फूलों की खुशबू अपनों का प्यार,मुबारक हो आपको विजयादशमी का त्योहार,सदा खुश रहे आप और आपका परिवार📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍दे बेशुमार खुशियां यह दशहरा आपको, हर प्यारी खुशी आपकी दीवानी हो जाए!आज की नई सुबह बेहद सुहानी हो जाए,दुखों की सारी कड़वाहट पुरानी हो जाए,दे बेशुमार खुशियां यह दशहरा आपको,हर प्यारी खुशी आपकी दीवानी हो जाए!📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍खुशी आप के कदम चूमे, कभी ना हो दुखों का सामना…खुशी आप के कदम चूमे,कभी ना हो दुखों का सामना…धन ही धन आए आपके आंगन में,दशहरा के शुभ अवसर पर हमारी है यही मनोकामना,विजयदशमी की ढ़ेर सारी शुभकामनाएं!📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍हैप्पी दशहरा 2021आपके जीवन में कभी-भी कोई गम ना आएआपको दशहरा की ढ़ेर सारी शुभकामनाएं,हैप्पी दशहरा 2021📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍अत्याचार मिटाने के लिए अब हर घर से एक राम निकलेगाअन्याय के रूप में अब नेताओं का भ्रष्टाचार हैरावण के रूप में नेताओं का अत्याचार हैभ्रष्टाचार और अत्याचार मिटाने के लिए शंख बजेगाअब हर घर से एक राम निकलेगामंगलमय हो दशहरा।📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍दशहरा के पावन पर्व की शुभकामनाएं!दशहरा एक उम्मीद जगाता है,बुराई के अंत की याद दिलाता है,जो चलता है सत्य की राह परवो विजय का प्रतीक बन जाता हैंदशहरा के पावन पर्व की शुभकामनाएं!📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएंसत्य स्थापित करके, इस देश से बुराई को मिटाना होगा,आतंकी रावण का दहन करने आज फिर राम को आना होगा,आपको पूरे परिवार सहित दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएं।📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍अधर्म पर धर्म की जीत का त्‍योहार है दशहराअधर्म पर धर्म की जीत,अन्याय पर न्याय की विजय,असत्य पर सत्य की जीत,बुराई पर अच्छाई की जय जयकार,यही है दशहरा का त्योहार।📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍आपको दशहरा की कोटि-कोटि बधाईइस दशहरा प्रण लेना होगा,रावण नहीं राम बनकर रहना होगा,बुराई के खिलाफ आवाज उठाना होगा,हर बच्ची को आज दुर्गा बनाना होगा।📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍दशहरा की शुभकामना व बधाई संदेशबुराई का होता है विनाश,दशहरा लाता है उम्मीद की आस,रावण की तरह आपके दुखों का हो नाश,सफलता और तरक्की के साथ यह दशहरा हो खास।📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍विजय दशमी की यूं दें बधाइयांभीतर के रावण को जो आग खुद लगाएंगेसही मायने में वे ही दशहरा मनाएंगे..!शुभ विजयादशमी.📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍यही है दशहरे के शुभ अवसर पर मनोकामना…खुशी आप के कदम चूमे,कभी ना हो दुखों का सामना,धन ही धन आए आप के अंगना,यही है दशहरे के शुभ अवसर पर मनोकामना।आप सभी को दशहरे की हार्दिक शुभकामनाएं📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍इससे पहले कि दशहरा की शाम हो जाए…इससे पहले कि दशहरा की शाम हो जाए,मेरा SMS औरों की तरह आम हो जाए,सारे Mobile Network जाम हो जाएं और दशहरा विश करना आम हो जाए… हैप्पी दशहरा आपको.📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍भीतर के रावण को जो आग खुद लगाएंगे…भीतर के रावण को जो आग खुद लगाएंगेसही मायने में वे ही दशहरा मनाएंगे..!शुभ विजयादशमी.📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍बुराई पर अच्छाई की जीत का समय…उत्सव का एक समय,बुराई पर अच्छाई की जीत का समय,एक समय जब दुनिया अच्छाई की शक्ति का उदाहरण देखती है,आइए हम उसी सच्ची भावना को जारी रखेंहैप्पी दशहरा.📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍रावण जलाओ, बुराई को आग लगाओ…रावण जलाओ,बुराई को आग लगाओ,अच्छाई को अपनाओ,हैप्पी दशहरा📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍विजयादशमी पर विजय का प्रतीक हैं श्रीरामविजयादशमी पर विजय का प्रतीक हैं श्रीरामबुराई पर अच्छाई का प्रतीक हैं श्री रामदशहरा की हार्दिक शुभकामनाएं📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍सफलता और तरक्की के साथ यह दशहरा हो खास…बुराई का होता है विनाश,दशहरा लाता है उम्मीद की आस,रावण की तरह आपके दुखों का हो नाश,सफलता और तरक्की के साथ यह दशहरा हो खास।📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍तहे दिल से कह रहा हूं हैप्पी दशहरा 2021आपकी जीवन में हो खुशियों का बसेरातहे दिल से कह रहा हूं हैप्पी दशहरा 2021📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍आयो मिलकर दशहरा मनाएं…आयो मिलकर दशहरा मनाएंअपने अंहकार रूपी रावण को जलाएंहैप्पी दशहरा📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍दशहरा का पर्व है अच्छाई का प्रतीक…दशहरा का पर्व है अच्छाई का प्रतीकबुराई की राह पर चलकर हार है निश्चितइस संदेश को करो अपने जीवन में शामिलदशहरा पर्व की शुभकामनाएं📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍बुरे पर अच्छे की जय जयकार…धर्म पर धर्म की जीत, अन्याय पर न्याय की विजयबुरे पर अच्छे की जय जयकार, यही है दशहरा का त्योहार।👭👭👭👭👭👭👭👭👭👭👭इस दशहरे हर मनुष्य बस एक नेक काम करें…इस दशहरे हर मनुष्य बस एक नेक काम करेंअंतर्मन में पनप रही हर बुराई का सर्वनाश करेंइसी कामना के साथ आपको दशहरे की शुभकामनाएं📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍 14 Oct 2021आपको पूरे परिवार सहित दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएंसत्य स्थापित करके, इस देश से बुराई को मिटाना होगाआतंकी रावण का दहन करने आज फिर राम को आना होगाआपको पूरे परिवार सहित दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएं📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍आपको दशहरा की ढेरों सारी शुभ कामनाएं…आपके जीवन में कभी-भी कोई गम ना आएआपको दशहरा की ढेरों सारी शुभ कामनाएं📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍Happy Dussehra 2021 Wishes: दशहरा पर्व की हार्दिक शुभकामनाएंइससे पहले की दशहरे की शाम हो जाए,मेरा मैसेज औरों की तरह आम हो जाए,सारे मोबाइल नेटवर्क जाम हो जाएं,और दशहरा विश करना आम हो जाए📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍*बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम की अध्यक्ष श्रीमती वनिता कासनियां पंजाब*आप सभी को Happy Vijayadashamतीन लोग आपका नंबर मांग रहे हैं, मैंने नहीं दिया.वो दशहरा के दिन आयेंगे उनके नाम हैं…सुख..!!शांति..!!समृधि..!!हैप्पी विजयदशमी।विजयदशमी पर विजय का प्रतीक हैं श्रीरामबुराई पर अच्छाई का प्रतीक हैं श्री रामदशहरा की हार्दिक शुभकामनाएं📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍

मान्यता है कि दशहरे के दिन ही प्रभु श्रीराम ने रावण का संहार किया था, इसलिए इस दिन को विजयदशमी भी कहा जाता है।
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*बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम संगरिया की टीम की तरफ से सभी को दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएं*
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: बुराई पर अच्छाई की जीत को दर्शाता है दशहरा शारदीय नवरात्रि के नौ दिन समाप्त होने के बाद दसवें दिन दशहरा मनाया जाता है। दशहरा का यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत के तौर पर मनाया जाता है। इस दिन भक्त मां दुर्गा की मूर्तियों का विसर्जन करते हैं। हिंदू पंचांग के मुताबिक आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दसवीं तिथि को दशहरा मनाया जाता है। मान्यता है कि दशहरे के दिन ही प्रभु श्रीराम ने रावण का संहार किया था, इसलिए इस दिन को विजयादशमी भी कहा जाता है। इस साल 15 अक्टूबर को यह त्योहार मनाया जाएगा।
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दशहरे के दिन जगह-जगह पर मेले का आयोजन होता है, साथ ही रावण, मेघनाथ और कुंभकरण के पुतले फूंके जाते हैं। असत्य पर सत्य की जीत के इस प्रतीक के दिन लोग अपने मित्रों, परिजनों और रिश्तेदारों को संदेश भेजकर शुभकामनाएं देते हैं। आप भी इन संदेशों के जरिए अपने परिजनों को विश कर सकते हैं-
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1- बुराई का होता है विनाश,
दशहरा लाता है उम्मीद की आस।
रावण की तरह आपके दुखों का हो नाश,
विजयदशमी की हार्दिक शुभकामनाएं
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2- संकटों का तम घनेरा,
हो न आकुल मन ये तेरा।
संकटों के तम छटेंगे होगा फिर सुंदर सवेरा,
मुबारक हो आपको दशहरा।
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3- रावण की तरह
मन के विकारों का नाश हो,
प्रभु श्रीराम का हृदय में
सर्वदा वास हो।
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4- ज्योत से ज्योत जगाते चलो
प्रेम की गंगा बहाते चलो
राह में आए जो दीन दुखी
सबको गले लगाते चलो
दिन आएगा सबका सुनहरा
मेरी तरफ से शुभ दशहरा
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5- कभी भी आप पर पड़े न दुख का साया,
प्रभु राम की कृपा का ऐसा असर रहे छाया,
हरदम धन धान्य रहे आप अंगना,
इस विजयादशमी यही है हमारी मनोकामना।
शुभ विजयादशमी
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फूलों की खुशबू अपनों का प्यार, मुबारक हो आपको विजयादशमी का त्योहार…
चांद की चांदनी शरद की बहार,

फूलों की खुशबू अपनों का प्यार,

मुबारक हो आपको विजयादशमी का त्योहार,

सदा खुश रहे आप और आपका परिवार
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दे बेशुमार खुशियां यह दशहरा आपको, हर प्यारी खुशी आपकी दीवानी हो जाए!
आज की नई सुबह बेहद सुहानी हो जाए,

दुखों की सारी कड़वाहट पुरानी हो जाए,

दे बेशुमार खुशियां यह दशहरा आपको,

हर प्यारी खुशी आपकी दीवानी हो जाए!

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खुशी आप के कदम चूमे, कभी ना हो दुखों का सामना…
खुशी आप के कदम चूमे,

कभी ना हो दुखों का सामना…

धन ही धन आए आपके आंगन में,

दशहरा के शुभ अवसर पर हमारी है यही मनोकामना,

विजयदशमी की ढ़ेर सारी शुभकामनाएं!

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हैप्पी दशहरा 2021
आपके जीवन में कभी-भी कोई गम ना आए

आपको दशहरा की ढ़ेर सारी शुभकामनाएं,

हैप्पी दशहरा 2021

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अत्याचार मिटाने के लिए अब हर घर से एक राम निकलेगा

अन्याय के रूप में अब नेताओं का भ्रष्टाचार है

रावण के रूप में नेताओं का अत्याचार है

भ्रष्टाचार और अत्याचार मिटाने के लिए शंख बजेगा

अब हर घर से एक राम निकलेगा

मंगलमय हो दशहरा।

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दशहरा के पावन पर्व की शुभकामनाएं!
दशहरा एक उम्मीद जगाता है,

बुराई के अंत की याद दिलाता है,

जो चलता है सत्य की राह पर

वो विजय का प्रतीक बन जाता हैं

दशहरा के पावन पर्व की शुभकामनाएं!

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दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएं

सत्य स्थापित करके, इस देश से बुराई को मिटाना होगा,

आतंकी रावण का दहन करने आज फिर राम को आना होगा,

आपको पूरे परिवार सहित दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएं।

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अधर्म पर धर्म की जीत का त्‍योहार है दशहरा

अधर्म पर धर्म की जीत,

अन्याय पर न्याय की विजय,

असत्य पर सत्य की जीत,

बुराई पर अच्छाई की जय जयकार,

यही है दशहरा का त्योहार।
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आपको दशहरा की कोटि-कोटि बधाई

इस दशहरा प्रण लेना होगा,

रावण नहीं राम बनकर रहना होगा,

बुराई के खिलाफ आवाज उठाना होगा,

हर बच्ची को आज दुर्गा बनाना होगा।

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दशहरा की शुभकामना व बधाई संदेश

बुराई का होता है विनाश,

दशहरा लाता है उम्मीद की आस,

रावण की तरह आपके दुखों का हो नाश,

सफलता और तरक्की के साथ यह दशहरा हो खास।

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विजय दशमी की यूं दें बधाइयां
भीतर के रावण को जो आग खुद लगाएंगे

सही मायने में वे ही दशहरा मनाएंगे..!

शुभ विजयादशमी.

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यही है दशहरे के शुभ अवसर पर मनोकामना…
खुशी आप के कदम चूमे,

कभी ना हो दुखों का सामना,

धन ही धन आए आप के अंगना,

यही है दशहरे के शुभ अवसर पर मनोकामना।

आप सभी को दशहरे की हार्दिक शुभकामनाएं

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इससे पहले कि दशहरा की शाम हो जाए…
इससे पहले कि दशहरा की शाम हो जाए,

मेरा SMS औरों की तरह आम हो जाए,

सारे Mobile Network जाम हो जाएं और दशहरा विश करना आम हो जाए… हैप्पी दशहरा आपको.

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भीतर के रावण को जो आग खुद लगाएंगे…
भीतर के रावण को जो आग खुद लगाएंगे

सही मायने में वे ही दशहरा मनाएंगे..!

शुभ विजयादशमी.

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बुराई पर अच्छाई की जीत का समय…
उत्सव का एक समय,

बुराई पर अच्छाई की जीत का समय,

एक समय जब दुनिया अच्छाई की शक्ति का उदाहरण देखती है,

आइए हम उसी सच्ची भावना को जारी रखें

हैप्पी दशहरा.

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रावण जलाओ, बुराई को आग लगाओ…
रावण जलाओ,

बुराई को आग लगाओ,

अच्छाई को अपनाओ,

हैप्पी दशहरा
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विजयादशमी पर विजय का प्रतीक हैं श्रीराम
विजयादशमी पर विजय का प्रतीक हैं श्रीराम

बुराई पर अच्छाई का प्रतीक हैं श्री राम

दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएं

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सफलता और तरक्की के साथ यह दशहरा हो खास…
बुराई का होता है विनाश,

दशहरा लाता है उम्मीद की आस,

रावण की तरह आपके दुखों का हो नाश,

सफलता और तरक्की के साथ यह दशहरा हो खास।

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तहे दिल से कह रहा हूं हैप्पी दशहरा 2021
आपकी जीवन में हो खुशियों का बसेरा

तहे दिल से कह रहा हूं हैप्पी दशहरा 2021
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आयो मिलकर दशहरा मनाएं…
आयो मिलकर दशहरा मनाएं
अपने अंहकार रूपी रावण को जलाएं
हैप्पी दशहरा

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दशहरा का पर्व है अच्छाई का प्रतीक…
दशहरा का पर्व है अच्छाई का प्रतीक

बुराई की राह पर चलकर हार है निश्चित

इस संदेश को करो अपने जीवन में शामिल

दशहरा पर्व की शुभकामनाएं
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बुरे पर अच्छे की जय जयकार…
धर्म पर धर्म की जीत, अन्याय पर न्याय की विजय

बुरे पर अच्छे की जय जयकार, यही है दशहरा का त्योहार।
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इस दशहरे हर मनुष्य बस एक नेक काम करें…
इस दशहरे हर मनुष्य बस एक नेक काम करें

अंतर्मन में पनप रही हर बुराई का सर्वनाश करें

इसी कामना के साथ आपको दशहरे की शुभकामनाएं
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 14 Oct 2021
आपको पूरे परिवार सहित दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएं
सत्य स्थापित करके, इस देश से बुराई को मिटाना होगा
आतंकी रावण का दहन करने आज फिर राम को आना होगा
आपको पूरे परिवार सहित दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएं
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आपको दशहरा की ढेरों सारी शुभ कामनाएं…
आपके जीवन में कभी-भी कोई गम ना आए

आपको दशहरा की ढेरों सारी शुभ कामनाएं
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Happy Dussehra 2021 Wishes: दशहरा पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं
इससे पहले की दशहरे की शाम हो जाए,

मेरा मैसेज औरों की तरह आम हो जाए,

सारे मोबाइल नेटवर्क जाम हो जाएं,

और दशहरा विश करना आम हो जाए
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*बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम की अध्यक्ष श्रीमती वनिता कासनियां पंजाब*
आप सभी को Happy Vijayadasham
तीन लोग आपका नंबर मांग रहे हैं, मैंने नहीं दिया.
वो दशहरा के दिन आयेंगे उनके नाम हैं…

सुख..!!

शांति..!!

समृधि..!!

हैप्पी विजयदशमी।

विजयदशमी पर विजय का प्रतीक हैं श्रीराम

बुराई पर अच्छाई का प्रतीक हैं श्री राम

दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएं
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, #भक्त_और_भगवान की सुंदर लीला। by समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाब संत की खीर श्री रघुनाथ दास गोस्वामी जी राधाकुंड गोवर्धन मे रहकर नित्य भजन करते थे। नित्य प्रभु को १००० दंडवत प्रणाम, २००० वैष्णवों को दंडवत प्रणाम और १ लाख हरिनाम करने का नियम था। भिक्षा मे केवल एक बार एक दोना छांछ (मठा) ब्रजवासियों के यहां से मांगकर पाते। एक दिन बाबा श्री राधा कृष्ण की मानसी सेवा कर रहे थे और उन्होंने ठाकुर जी से पूछा कि प्यारे आज क्या भोग लगाने की इच्छा है ? ठाकुर जी ने कहां बाबा ! आज खीर पाने की इच्छा है, बढ़िया खीर बना। बाबा ने बढ़िया दूध औटाकर मेवा डालकर रबड़ी जैसी खीर बनाई। ठाकुर जी खीर पाकर बड़े प्रसन्न हुए और कहा.. .बाबा ! हमे तो लगता था कि तू केवल छांछ पीने वाला बाबा है, तू कहां खीर बनाना जानता होगा ? परंतु तुझे तो बहुत सुंदर खीर बनानी आती है। .इतनी अच्छी खीर तो हमने आज तक नही पायी, बाबा ! तू थोड़ी खीर पीकर तो देख। .बाबा बोले, हमको तो छांछ पीकर भजन करने की आदत है और आँत ऐसी हो गयी कि इतना गरिष्ट भोजन अब पचेगा नही, आप ही पीओ।.ठाकुर जी बोले, बाबा ! अब हमारी इतनी भी बात नही मानेगा क्या? .बातों बातों में ठाकुर जी ने खीर का कटोरा बाबा के मुख से लगा दिया। .भगवान के प्रेमाग्रह के कारण और उनके अधरों से लगने के कारण वह खीर अत्यंत स्वादिष्ट लगी और बाबा थोड़ी अधिक खीर खा गए। .मानसी सेवा समाप्त होने पर ठाकुर जी तो चले गए गौ चराने और बाबा पड़ गए ज्वर (बुखार) से बीमार। .ब्रजवासियों मे हल्ला मच गया कि हमारा बाबा तो बीमार हो गया है। .बात जब जातिपुरा (श्रीनाथ मंदिर) मे श्री विट्ठलनाथ गुसाई जी के पास पहुंची तो उन्होंने अपने वैद्य से कहाँ की जाकर श्री रघुनाथ दास जी का उपचार करो, वे हमारे ब्रज के महान रसिक संत है। .वैद्य जी ने बाबा की नाड़ी देख कर बताया कि बाबा ने तो खीर खायी है।.ब्रजवासी वैद्य से कहने लगे, २० वर्षो से तो नित्य हम बाबा को देखते आ रहे है, ये बाबा तो ब्रजवासियों के घरों से एक दोना छांछ पीकर भजन करता है। .बाबा कही आता जाता तो है नही, खीर खाने काहाँ चला गया? .ब्रजवासी वैद्य से लड़ने लगे और कहने लगे कि तुम कैसे वैद्य हो, तुम्हें तो कुछ नही आता है।.वैद्य जी बोले, मै अभी एक औषधि देता हूं जिससे वमन हो जाएगा (उल्टी होगी) और पेट मे जो भी है वह बाहर आएगा। .यदि खीर नही निकली तो मैं अपने आयुर्वेद के सारे ग्रंथ यमुना जी मे प्रवाहित करके उपचार करना छोड़ दूंगा। .ब्रजवासी बोले, ठीक है औषधि का प्रयोग करो। बाबा ने जैसे ही औषधि खायी वैसे वमन हो गया और खीर बाहर निकली। .ब्रजवासी पूछने लगे, बाबा ! तूने खीर कब खायी? बाबा तू तो छांछ के अतिरिक्त कुछ पाता नही है, खीर कहां से पायी?.रघुनाथ दास जी कुछ बोले नही क्योंकि वे अपनी उपासना को प्रकट नही करना चाहते थे अतः उन्होंने इस रहस्य को गुप्त रहने दिया और मौन रहे। .आस पास के जो ब्रजवासी वहां आए थे वो घर चले गए परंतु उनमे बाबा के प्रति विश्वास कम हो गया....सब तरफ बात फैलने लगी कि बाबा तो छुपकर खीर खाता होगा। .श्रीनाथ जी ने श्री विट्ठलनाथ गुसाई जी को सारी बात बतायी और कहां की आप जाकर ब्रजवासियों के मन की शंका को दूर करो – कहीं ब्रजवासियों द्वारा संत अपराध ना हो जाए। .श्री विट्ठलनाथ गुसाई जी ने ब्रजवासियों से कहां की श्री रघुनाथ दास जी परमसिद्ध संत है। .वे तो दीनता की मूर्ति है, बाबा अपने भजन को गुप्त रखना चाहते है अतः वे कुछ बोलेंगे नही। .उन्होंने जो खीर खायी वो इस बाह्य जगत में नही, वह तो मानसी सेवा के भावराज्य में ठाकुर जी ने स्वयं उन्हें खिलायी है।.धन्य है ऐसे महान संत श्री रघुनाथ दास गोस्वामी🙌👏🌺🌺जय जय श्री राधे श्याम 🌺🌺 श्री राधा रानी 🌹🌷राधे राधे 🌷मेरी विनती यही है राधा रानी, कृपा बरसाए रखनामुझे तेरा ही सहारा महारानी, चरणों से लिपटाए रखनामेरी विनती यही है राधा रानी, कृपा बरसाए रखना🌹श्री राधा स्तुतितपत-कांचन गौरांगी राधे वृन्दावनेश्वरी वृषभानु सुते देवी प्रणमामि हरी प्रिये🌹🌹हरेकृष्ण 🌷🙏🌷

काउंसलिंग के दौरान अक्सर प्रेमिकाएं/पत्नियां एक बात कहती पाई जातीं हैं किBy Vnita kasnia Punjab ?‘उसने मुझे तब छोड़ा जब मुझे उसकी सबसे ज्यादा ज़रूरत थी। मैंने उसे इतना प्यार किया,उसने मेरे साथ ऐसा क्यों किया?’गौतम बुद्ध ने तब गृह त्याग किया जब उनकी पत्नी यशोधरा नवजात शिशु की मां थी।राम ने सीता का त्याग तब किया जब सीता गर्भवती थी।सीता की अग्निपरीक्षा के कारण राम आज भी कटघरे में खड़े किए जाते हैं।कुंती ने जब सूर्य से कहा कि ‘आपके प्रेम का प्रताप मेरे गर्भ में पल रहा है’ तो सूर्य बादलों में छुप गए।कर्ण भी अपने पिता से सवाल पूछने के बजाय कुंती से ही पूछते हैं- ‘आपने मुझे जन्म देते ही गंगा में प्रवाहित कर दिया, फिर कैसी माता?’यह नहीं सोचा कि अगर उनके महान पिता सूर्य देवता उन्हें अपना नाम देते तो कोई भी कुंती कर्ण को कभी खुद से अलग नहीं करती।[1]महिलाएं कई बार शादी से पहले मां बन जाती हैं क्योंकि उनके विवाहित प्रेमी उन्हें झांसा देते हैं कि कुछ ही दिनों में उनका तलाक होने वाला है।ऐसे सवाल जब-जब उठते हैं,सोचने पर मजबूर होना पड़ता है कि क्या वाकई स्त्री की स्वायत्तता और अस्मिता तब तक निर्धारित नहीं होती जब तक उसे पुरुष का संरक्षण न मिले?शकुंतला की कहानी सबको मालूम है। राजा दुष्यंत ने उसे जंगल में देखा और उससे प्रेम विवाह किया। फिर शकुंतला गर्भवती हुई। इस बीच दुष्यंत राजधानी लौट गए।जब शकुंतला उनसे मिलने पहुंची तो राजा ने उसे पहचानने से इनकार कर दिया। कथा यह है कि ऐसा ऋषि दुर्वासा के श्राप के कारण हुआ।जो भी हो शकुंतला को परित्यक्ता की तरह रहना पड़ा।यही हाल सीता का भी हुआ। एक आम नागरिक के कहने पर राम ने लोकापवाद का हवाला देकर अपनी गर्भवती पत्नी सीता को वनवास दे दिया,जबकि इससे पहले वे उनकी अग्निपरीक्षा ले चुके थे।काफी समय बाद सीता ने अकेले दम पर पाले गए अपने पुत्रों को उनके पिता को सौंप दिया और स्वयं धरती में समा गईं।शकुंतलापुत्र भरत जब शेर के मुंह में हाथ डालकर उसके दांत गिन रहा था,तो दुष्यंत को लगा कि जरूर यह किसी राजवंश का उत्तराधिकारी है।उन्होंने भी शकुंतला से अपने पुत्र को यह कहकर ले लिया कि यह तो मेरा बेटा है, इसलिए राजमहल में रहेगा।शकुंतला ने पुत्र को तो सौंप दिया लेकिन उनके साथ स्वयं नहीं गई।यह एक स्वाभिमानी स्त्री का आत्मसम्मान था। वह उस पति को क्यों स्वीकार करे,जिसने उसे तब छोड़ दिया,जब उसे उसकी सबसे ज्यादा जरूरत थी?और बुद्ध तो सत्य, ज्ञान और शांति की खोज में निकले थे।क्या वे नहीं जानते थे कि अकेली औरतों की समाज में क्या दशा होती है?आज भी सवाल सिर्फ औरतों से पूछे जाते हैं। अकेली यशोधरा ने कैसे पाला होगा अपने बेटे राहुल को?[2]एक बच्चे को पालने में मां और बाप दोनों की भूमिका होती है।अगर बच्चे का बाप नहीं है तो कोई बात नहीं,लेकिन अगर है तो वह अनाथ की तरह क्यों जिए?एक बार यशोधरा बुद्ध के आश्रम में गईं और उनसे सवाल किया, ‘आप तो बुद्धत्व प्राप्ति के लिए निकल पड़े। मेरा क्या? मेरे बारे में सोचा?’ कहते हैं,बुद्ध के पास कोई उत्तर नहीं था,सिवाय मौन के। [3]खैर,राम और बुद्ध बहुत बड़े प्रयोजन के लिए धरा पर अवतरित हुए थे।उनकी जीवनसंगिनियों को अपने पतियों का लम्बे समय तक का सान्निध्य नसीब होना विधि के विधान में ही नहीं था।तत्कालीन समाज स्त्रियों की इस सहनशक्ति को शक्ति का पर्याय मानकर पूजता था।'लाज और शर्म स्त्री का गहना होता है',कहकर उसी को परिवार और समाज से सामंजस्य करना सिखाया जाता था।पुरुष को जीवन की दूसरी चुनौतियो से जूझने में नारियों के अधिकारों और इच्छाओं के सम्बन्ध में सोचने की फुर्सत ही नहीं मिलती थीऔर तो और जो स्त्रियाँ दबे स्वर में भी अपनी इच्छाएं व्यक्त करने का साहस कर लेतीं थीं उनको उनके परिवार की ही वरिष्ठ नारियाँ 'निर्लज्ज' की संज्ञा दे डालतीं थीं।यह उन स्त्रियों का प्रारब्ध कह लें या जीवन की विडम्बना।आज की स्थिति बदल रही है,हालांकि पूरी तरह बदली नहीं है।आज की नारी को पहले जैसी भीषण स्थिति से उबारने के लिए कानून,आर्थिक निर्भरता और समाज का सहारा मिल रहा है।प्राचीन समय में नारी न्याय के लिए अपने परिवार के सहयोग की राह तकती थी।उस समय सीता,यशोधरा और शकुन्तला की सहना ही नियति थी,आज के समय में जो प्रासंगिक नहीं रह गई है।आखिर नारी भी तो इंसान है।अब सीता को अपना राम खुद बनना है,यशोधरा को अपना बुद्धत्व स्वयं पाना है और शकुन्तला भी दुष्यन्त के निमन्त्रण की कृपा की मोहताज नहीं है।अब अन्याय किसी भी सूरत में सहनीय नहीं होना चाहिए।नारी को अपने शारीरिक,मानसिक,भावनात्मक और आध्यात्मिक मूल्यों को सहेजते हुए अब उसे "जियो और जीने दो" के सिद्धान्त पर चलना है।नारी का पुरूष प्रतियोगी नहीं सहयोगी है।इतिहास में नारी पर हुए अन्याय का बदला नारीवाद का झंडा लेकर नारी द्वारा पुरुष का मानासिक शोषण करते हुए समाज का रूप विकृत करके नहीं मिलेगा,अपितु उसकी सुख-दुख में सहचरी बनकर मिलेगा।नारी को यदि सम्मान पाना है तो समाज और परिवार के सदस्यों का सम्मान करके ही मिलेगा।नारी हो या पुरूष,उसको समझना चाहिए कि कर्त्तव्यों के वृक्ष पर ही अधिकारों के फल लगते हैं।तब स्त्रियों के सम्बन्ध में राम और बुद्ध भले ही मौन रह गए हों,परन्तु अब पुरुष को नारी की इच्छाओं और आवश्यकताओं का सम्मान करना चाहिए….…जिससे नारी भी अपने नारीसुलभ कोमल गुणों से घर परिवार व समाज को सुन्दर रूप देने में स्वाभाविक ही आगे आए।"सम्मान दो,सम्मान लो।" दोनों पर यह बात लागू होनी चाहिए।जोर जबरदस्ती और उपदेश से ज्यादा प्रेमपूर्ण उदाहरण हमेशा बेहतर परिणाम देते हैं।अस्वीकरण : मेरा उद्देश्य इस उत्तर में युग पुरूषों और अवतारों राम और बुद्ध का तिरस्कार करना नहीं है अपितु विधि के विधान के कारण जो परिस्थितियाँ उत्पन्न हुई,उसके कारण जनमानस में उनके विरूद्ध जो रोष उत्पन्न होता है,उसको कम करना है।उन नारियों का स्वाभिमान अपनी जगह सही था और उन युग पुरूषों ने चूंकि मानवता का कल्याण करना था,उसके कारण उनकी पत्नियों को उनसे अलग होना पड़ा जबकि वे दोनों उनसे अत्यधिक प्रेम करते थे।राम और बुद्ध का उदाहरण गृहस्थ धर्म के लिए लेना कहीं से भी श्रेयस्कर नहीं है।आंशिक स्त्रोत:Google Image Result for https://assets.saatchiart.com/saatchi/955709/art/5601091/4670901-SHHNIBPT-6.jpgस्त्री के लिए क्यों मौन रह गए बुद्ध और राम?फुटनोट[1] http://.काउंसलिंग के दौरान अक्सर प्रेमिकाएं/पत्नियां एक बात कहती पाई जातीं हैं कि ‘उसने मुझे तब छोड़ा जब मुझे उसकी सबसे ज्यादा ज़रूरत थी। मैंने उसे इतना प्यार किया,उसने मेरे साथ ऐसा क्यों किया?’ पति या प्रेमी कब भगोड़े नहीं थे? गौतम बुद्ध तब भागे जब उनकी पत्नी यशोधरा नवजात शिशु की मां थी। राम ने सीता का त्याग तब किया जब सीता गर्भवती थी। कुंती ने जब सूर्य से कहा कि ‘आपके प्रेम का प्रताप मेरे गर्भ में पल रहा है’ तो सूर्य बादलों में छुप गए। फिर भी बुद्ध ‘भगवान’ कहलाए और राम ‘मर्यादा पुरुषोत्तम’ और तो और, कर्ण भी अपने बाप से सवाल पूछने के बजाय कुंती से ही पूछते हैं- ‘आपने मुझे जन्म देते ही गंगा में प्रवाहित कर दिया, फिर कैसी माता?’ यह नहीं सोचा कि अगर उनके महान पिता सूर्य देवता उन्हें अपना नाम देते तो कोई भी कुंती कर्ण को कभी खुद से अलग नहीं करती। [2] http://.नारीवाद का नारा लगाने वाली औरतें भी कभी-कभी पक्षपात करती दिखाई देती हैं।जब किसी स्त्री का स्वाभिमान और सम्मान खतरे में हो तो नारीवाद वाली ऐसी बुद्धिजीवी स्त्रियां भी उन पुरुषों के पक्ष में खड़ी पाई जाती हैं जिनका समाज में रुतबा है। पद्मश्री रीता गांगुली (गजल गायिका और राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में संस्कृत नाटक के मंचन से संबद्ध) ने नाटक की पात्र से कहा- ‘अब तुम शकुंतला का रोल बखूबी कर सकती हो।’ उसने पूछा, ‘क्यों?’ उन्होंने कहा कि ‘अब तुम परिपक्व हुईं। पति ने तुम्हें छोड़ दिया। समाज ने नकार दिया। तुम अपने अस्तिस्व के लिए,अपनी पहचान के लिए लड़ रही हो।अब तुम्हारे स्वाभिमान पर आन पड़ी है।’ [3] http://.एक बच्चे को पालने में मां और बाप दोनों की भूमिका होती है। अगर बच्चे का बाप नहीं है तो कोई बात नहीं, लेकिन अगर है तो वह अनाथ की तरह क्यों जिए? बुद्ध (ज्ञाता) कहलाने वाला पुरुष अपनी सोती हुई पत्नी और दूध पीते बच्चे को छोड़ कर किस ज्ञान की प्राप्ति के लिए निकला? एक बार यशोधरा बुद्ध के आश्रम में गईं और उनसे सवाल किया, ‘आप तो बुद्धत्व प्राप्ति के लिए निकल पड़े। मेरा क्या? मेरे बारे में सोचा?’ कहते हैं,बुद्ध के पास कोई उत्तर नहीं था,सिवाय मौन के।

काउंसलिंग के दौरान अक्सर प्रेमिकाएं/पत्नियां एक बात कहती पाई जातीं हैं कि By Vnita kasnia Punjab ? ‘ उसने मुझे तब छोड़ा जब मुझे उसकी सबसे ज्यादा ज़रूरत थी। मैंने उसे इतना प्यार किया,उसने मेरे साथ ऐसा क्यों किया?’ गौतम बुद्ध ने तब गृह त्याग किया जब उनकी पत्नी यशोधरा नवजात शिशु की मां थी। राम ने सीता का त्याग तब किया जब सीता गर्भवती थी।सीता की अग्निपरीक्षा के कारण राम आज भी कटघरे में खड़े किए जाते हैं। कुंती ने जब सूर्य से कहा कि ‘आपके प्रेम का प्रताप मेरे गर्भ में पल रहा है’ तो सूर्य बादलों में छुप गए। कर्ण भी अपने पिता से सवाल पूछने के बजाय कुंती से ही पूछते हैं- ‘आपने मुझे जन्म देते ही गंगा में प्रवाहित कर दिया, फिर कैसी माता?’ यह नहीं सोचा कि अगर उनके महान पिता सूर्य देवता उन्हें अपना नाम देते तो कोई भी कुंती कर्ण को कभी खुद से अलग नहीं करती। [1] महिलाएं कई बार शादी से पहले मां बन जाती हैं क्योंकि उनके विवाहित प्रेमी उन्हें झांसा देते हैं कि कुछ ही दिनों में उनका तलाक होने वाला है। ऐसे सवाल जब-जब उठते हैं,सोचने पर मजबूर होना पड़ता है कि क्या वाकई स्त्री की स्वायत्तता और अस्मिता तब तक निर...

*हनुमानजी की दिव्य उधारी!!!!!!!! #बाल #वनिता #महिला #वृद्ध #आश्रम की #अध्यक्ष #श्रीमती #वनिता_कासनियां #पंजाब #संगरिया #राजस्थान 🙏🙏❤️*पढ़ कर आनन्द ही आनन्द होगा जी,*सब पर कर्जा हनुमान जी का,सब ऋणी हनुमानजी महाराज के।* *रामजी लंका पर विजय प्राप्त करके आए तो, भगवान ने विभीषण जी, जामवंत जी, अंगद जी, सुग्रीव जी सब को अयोध्या से विदा किया। तो सब ने सोचा हनुमान जी को प्रभु बाद में बिदा करेंगे, लेकिन रामजी ने हनुमानजी को विदा ही नहीं किया,अब प्रजा बात बनाने लगी कि क्या बात सब गए हनुमानजी नहीं गए अयोध्या से!**अब दरबार में काना फूसी शुरू हुई कि हनुमानजी से कौन कहे जाने के लिए, तो सबसे पहले माता सीता की बारी आई कि आप ही बोलो कि हनुमानजी चले जाएं।**माता सीता बोलीं मैं तो लंका में विकल पड़ी थी, मेरा तो एक एक दिन एक एक कल्प के समान बीत रहा था, वो तो हनुमानजी थे,जो प्रभु मुद्रिका लेके गए, और धीरज बंधवाया कि...!**कछुक दिवस जननी धरु धीरा।**कपिन्ह सहित अइहहिं रघुबीरा।।**निसिचर मारि तोहि लै जैहहिं।**तिहुँ पुर नारदादि जसु गैहहिं॥**मै तो अपने बेटे से बिल्कुल भी नहीं बोलूंगी अयोध्या छोड़कर जाने के लिए,आप किसी और से बुलवा लो।**अब बारी आई लक्षमण जी की तो लक्ष्मण जी ने कहा, मै तो लंका के रणभूमि में वैसे ही मरणासन्न अवस्था में पड़ा था, पूरा रामदल विलाप कर रहा था।**प्रभु प्रलाप सुनि कान बिकल भए बानर निकर।**आइ गयउ हनुमान जिमि करुना महँ बीर रस।।**ये जो खड़ा है ना , वो हनुमानजी का लक्ष्मण है। मै कैसे बोलूं, किस मुंह से बोलूं कि हनुमानजी अयोध्या से चले जाएं!**अब बारी आई भरत जी की, अरे! भरत जी तो इतना रोए, कि रामजी को अयोध्या से निकलवाने का कलंक तो वैसे ही लगा है मुझ पर, हनुमान जी का सब मिलके और लगवा दो!**और दूसरी बात ये कि...!**बीतें अवधि रहहिं जौं प्राना।* *अधम कवन जग मोहि समाना॥**मैंने तो नंदीग्राम में ही अपनी चिता लगा ली थी, वो तो हनुमानजी थे जिन्होंने आकर ये खबर दी कि...!**रिपु रन जीति सुजस सुर गावत।**सीता सहित अनुज प्रभु आवत॥**मैं तो बिल्कुल न बोलूं हनुमानजी से अयोध्या छोड़कर चले जाओ, आप किसी और से बुलवा लो।**अब बचा कौन..? सिर्फ शत्रुघ्न भैया। जैसे ही सब ने उनकी तरफ देखा, तो शत्रुघ्न भैया बोल पड़े मैंने तो पूरी रामायण में कहीं नहीं बोला, तो आज ही क्यों बुलवा रहे हो, और वो भी हनुमानजी को अयोध्या से निकालने के लिए, जिन्होंने ने माता सीता, लक्षमण भैया, भरत भैया सब के प्राणों को संकट से उबारा हो! किसी अच्छे काम के लिए कहते तो बोल भी देता। मै तो बिल्कुल भी न बोलूं।**अब बचे तो मेरे राघवेन्द्र सरकार,* *माता सीता ने कहा प्रभु! आप तो तीनों लोकों ये स्वामी है, और देखती हूं आप हनुमानजी से सकुचाते है।और आप खुद भी कहते हो कि...!**प्रति उपकार करौं का तोरा।* *सनमुख होइ न सकत मन मोरा॥**आखिर आप के लिए क्या अदेय है प्रभु! राघवजी ने कहा देवी कर्जदार जो हूं, हनुमान जी का, इसीलिए तो**सनमुख होइ न सकत मन मोरा**देवी! हनुमानजी का कर्जा उतारना आसान नहीं है, इतनी सामर्थ्य राम में नहीं है, जो "राम नाम" में है। क्योंकि कर्जा उतारना भी तो बराबरी का ही पड़ेगा न...! यदि सुनना चाहती हो तो सुनो हनुमानजी का कर्जा कैसे उतारा जा सकता है।**पहले हनुमान विवाह करें*,*लंकेश हरें इनकी जब नारी।**मुदरी लै रघुनाथ चलै,निज पौरुष लांघि अगम्य जे वारी।**अायि कहें, सुधि सोच हरें, तन से, मन से होई जाएं उपकारी।**तब रघुनाथ चुकायि सकें, ऐसी हनुमान की दिव्य उधारी।।**देवी! इतना आसान नहीं है, हनुमान जी का कर्जा चुकाना। मैंने ऐसे ही नहीं कहा था कि...!**"सुनु सुत तोहि उरिन मैं नाहीं"**मैंने बहुत सोच विचार कर कहा था। लेकिन यदि आप कहती हो तो कल राज्य सभा में बोलूंगा कि हनुमानजी भी कुछ मांग लें।**दूसरे दिन राज्य सभा में सब एकत्र हुए,सब बड़े उत्सुक थे कि हनुमानजी क्या मांगेंगे, और रामजी क्या देंगे।**रामजी ने हनुमान जी से कहा! सब लोगों ने मेरी बहुत सहायता की और मैंने, सब को कोई न कोई पद दे दिया। विभीषण और सुग्रीव को क्रमशः लंका और किष्कन्धा का राजपद,अंगद को युवराज पद। तो तुम भी अपनी इच्छा बताओ...?**हनुमानजी बोले! प्रभु आप ने जितने नाम गिनाए, उन सब को एक एक पद मिला है, और आप कहते हो...!**"तैं मम प्रिय लछिमन ते दूना"**तो फिर यदि मै दो पद मांगू तो..?**सब लोग सोचने लगे बात तो हनुमानजी भी ठीक ही कह रहे हैं। रामजी ने कहा! ठीक है, मांग लो, सब लोग बहुत खुश हुए कि आज हनुमानजी का कर्जा चुकता हुआ।**हनुमानजी ने कहा! प्रभु जो पद आप ने सबको दिए हैं, उनके पद में राजमद हो सकता है, तो मुझे उस तरह के पद नहीं चाहिए, जिसमे राजमद की शंका हो, तो फिर...! आप को कौन सा पद चाहिए...?**हनुमानजी ने रामजी के दोनों चरण पकड़ लिए, प्रभु ..! हनुमान को तो बस यही दो पद चाहिए।**हनुमत सम नहीं कोउ बड़भागी।**नहीं कोउ रामचरण अनुरागी।।**जानकी जी की तरफ देखकर मुस्कुराते हुए राघवजी बोले, लो उतर गया हनुमानजी का कर्जा!**और अभी तक जिसको बोलना था, सब बोल चुके है, अब जो मै बोलता हूं उसे सब सुनो, रामजी भरत भैया की तरफ देखते हुए बोले...!*#Vnita🙏🙏❤️*"हे! भरत भैया' कपि से उऋण हम नाही"*........*हम चारों भाई चाहे जितनी बार जन्म लेे लें, #हनुमानजी से उऋण नही हो सकते।* *जय #श्री #हनुमान जी #महाराज की जय*

*हनुमानजी की दिव्य उधारी!!!!!!!! #बाल #वनिता #महिला #वृद्ध #आश्रम की #अध्यक्ष #श्रीमती #वनिता_कासनियां #पंजाब #संगरिया #राजस्थान🙏🙏❤️ *पढ़ कर आनन्द ही आनन्द होगा जी,*सब पर कर्जा हनुमान जी का,सब ऋणी हनुमानजी महाराज के।*  *रामजी लंका पर विजय प्राप्त करके आए तो, भगवान ने विभीषण जी, जामवंत जी, अंगद जी, सुग्रीव जी सब को अयोध्या से विदा किया। तो सब ने सोचा हनुमान जी को प्रभु बाद में बिदा करेंगे, लेकिन रामजी ने हनुमानजी को विदा ही नहीं किया,अब प्रजा बात बनाने लगी कि क्या बात सब गए हनुमानजी नहीं गए अयोध्या से!* *अब दरबार में काना फूसी शुरू हुई कि हनुमानजी से कौन कहे जाने के लिए, तो सबसे पहले माता सीता की बारी आई कि आप ही बोलो कि हनुमानजी चले जाएं।* *माता सीता बोलीं मैं तो लंका में विकल पड़ी थी, मेरा तो एक एक दिन एक एक कल्प के समान बीत रहा था, वो तो हनुमानजी थे,जो प्रभु मुद्रिका लेके गए, और धीरज बंधवाया कि...!* *कछुक दिवस जननी धरु धीरा।* *कपिन्ह सहित अइहहिं रघुबीरा।।* *निसिचर मारि तोहि लै जैहहिं।* *तिहुँ पुर नारदादि जसु गैहहिं॥* *मै तो अपने बेटे से बिल्कुल भी नहीं बोलूंगी अयोध्या छोड़कर जान...