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मंगलवार को हनुमान जी की पूजा करने से वो प्रसन्न होते हैं। By समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाब, हनुमान जी अपने भक्तों पर अपार कृपा बरसाते हैं और उनकी मनोकामनाओं की पूर्ति करते हैं। मंगलवार का दिन अत्यंत शुभ और मंगलकारी हैं। मंगलवार को हनुमान जी के उपाय जीवन की सभी परेशानियों से मुक्ति दिलाते हैं । अगर नौकरी-रोजगार की तलाश में हैं और हर तरफ से निराशा ही निराशा हैं तो इस मंगलवार के दिन आजमाएं ये उपाय।बेरोजगार या व्यापार में हानिआप बेरोजगार है या आपका व्यापार नहीं चल रहा है तो आप मंदिर में बैठकर 11 मंगलवार तक सुंदरकांड का पाठ करें। यह पाठ शुरू करने के लिए हनुमान जयंती के दिन चुनेंगे तो अतिउत्तम रहेगा।नौकरी में परेशानीयदि आप नौकरी पाना चाहते हैं तो नौकरी के लिए इंटरव्यू देने जाएं, तो जेब में लाल रूमाल या कोई लाल कपड़ा रखें लेकिन यह कपड़ा या रूमाल बजरंगबली के चरणों में रखा हुआ होना चाहिए।पानी से धोकर स्वच्छ कर लेंहनुमान जी श्रीराम के भक्त हैं। राम जी की पूजा करने या उनका नाम लेने से हनुमान जी स्वयं प्रसन्न हो जाते हैं। मंगलवार के दिन सुबह स्नान करने के बाद बड़ (बरगद) के पेड़ का एक पत्ता तोड़कर उसे पानी से धोकर स्वच्छ कर लें। इस पत्ते को कुछ देर हनुमानजी के सामने रखें और इसके बाद केसर से इस पर श्रीराम लिखें। पूजा के बाद पत्ते को अपने पर्स में रख लें। ऐसा करने से पूरे वर्ष धन की कमी नहीं होती है। आपका बटुआ पैसों से भरा रहेगा।नोट- उपरोक्‍त दी गई जानकारी व सूचना सामान्‍य उद्देश्‍य के लिए दी गई है। हम इसकी सत्‍यता की जांच का दावा नही करतें हैं यह जानकारी विभिन्‍न माध्‍यमों जैसे ज्‍योतिषियों, धर्मग्रंथों, पंचाग आदि से ली गई है । इस उपयोग करने वाले की स्‍वयं की जिम्‍मेंदारी होगी ।He is pleased to worship Hanuman on Tuesday. By social worker Vanita Kasani Punjab, Hanuman ji shows immense grace to his devotees and fulfills their wishes. Tuesday is auspicious and auspicious. On Tuesday, Lord Hanuman's remedy gives relief from all the troubles of life. If you are looking for job-employment and there is disappointment from all sides, then try these measures on this Tuesday. Unemployed or loss in business If you are unemployed or your business is not running, then you should sit in the temple and recite Sunderkand till 11 Tuesday. If you choose on the day of Hanuman Jayanti to start this lesson, then it will be excellent. If you want to get a job then go for a job interview, then keep a red handkerchief or a red cloth in the pocket but this cloth or handkerchief should be placed at the feet of Bajrangbali. Wipe clean with water Hanuman ji is a devotee of Shri Ram. Hanuman ji himself gets pleased by worshiping Ram or taking his name. After bathing in the morning on Tuesday, break a leaf of the banyan tree and wash it with water and clean it. Keep this leaf in front of Hanumanji for some time and then write Sri Ram on it with saffron. After the puja keep the leaf in your purse. By doing this there is no shortage of funds throughout the year. Your wallet will be full of money. Note- The information and information given above is given for general purpose. We do not claim to check its veracity. This information has been taken from various media such as astrologers, scriptures, panchgas, etc. This user will have his own responsibility.

मंगलवार को हनुमान जी की पूजा करने से वो प्रसन्न होते हैं। By समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाब, हनुमान जी अपने भक्तों पर अपार कृपा बरसाते हैं और उनकी मनोकामनाओं की पूर्ति करते हैं। मंगलवार का दिन अत्यंत शुभ और मंगलकारी हैं। मंगलवार को हनुमान जी के उपाय जीवन की सभी परेशानियों से मुक्ति दिलाते हैं । अगर नौकरी-रोजगार की तलाश में हैं और हर तरफ से निराशा ही निराशा हैं तो इस मंगलवार के दिन आजमाएं ये उपाय।

बेरोजगार या व्यापार में हानि
आप बेरोजगार है या आपका व्यापार नहीं चल रहा है तो आप मंदिर में बैठकर 11 मंगलवार तक सुंदरकांड का पाठ करें। यह पाठ शुरू करने के लिए हनुमान जयंती के दिन चुनेंगे तो अतिउत्तम रहेगा।नौकरी में परेशानी
यदि आप नौकरी पाना चाहते हैं तो नौकरी के लिए इंटरव्यू देने जाएं, तो जेब में लाल रूमाल या कोई लाल कपड़ा रखें लेकिन यह कपड़ा या रूमाल बजरंगबली के चरणों में रखा हुआ होना चाहिए।

पानी से धोकर स्वच्छ कर लें
हनुमान जी श्रीराम के भक्त हैं। राम जी की पूजा करने या उनका नाम लेने से हनुमान जी स्वयं प्रसन्न हो जाते हैं। मंगलवार के दिन सुबह स्नान करने के बाद बड़ (बरगद) के पेड़ का एक पत्ता तोड़कर उसे पानी से धोकर स्वच्छ कर लें। इस पत्ते को कुछ देर हनुमानजी के सामने रखें और इसके बाद केसर से इस पर श्रीराम लिखें। पूजा के बाद पत्ते को अपने पर्स में रख लें। ऐसा करने से पूरे वर्ष धन की कमी नहीं होती है। आपका बटुआ पैसों से भरा रहेगा।

नोट- उपरोक्‍त दी गई जानकारी व सूचना सामान्‍य उद्देश्‍य के लिए दी गई है। हम इसकी सत्‍यता की जांच का दावा नही करतें हैं यह जानकारी विभिन्‍न माध्‍यमों जैसे ज्‍योतिषियों, धर्मग्रंथों, पंचाग आदि से ली गई है । इस उपयोग करने वाले की स्‍वयं की जिम्‍मेंदारी होगी ।He is pleased to worship Hanuman on Tuesday. By social worker Vanita Kasani Punjab, Hanuman ji shows immense grace to his devotees and fulfills their wishes. Tuesday is auspicious and auspicious. On Tuesday, Lord Hanuman's remedy gives relief from all the troubles of life. If you are looking for job-employment and there is disappointment from all sides, then try these measures on this Tuesday.

 Unemployed or loss in business
 If you are unemployed or your business is not running, then you should sit in the temple and recite Sunderkand till 11 Tuesday. If you choose on the day of Hanuman Jayanti to start this lesson, then it will be excellent.
 If you want to get a job then go for a job interview, then keep a red handkerchief or a red cloth in the pocket but this cloth or handkerchief should be placed at the feet of Bajrangbali.

 Wipe clean with water
 Hanuman ji is a devotee of Shri Ram. Hanuman ji himself gets pleased by worshiping Ram or taking his name. After bathing in the morning on Tuesday, break a leaf of the banyan tree and wash it with water and clean it. Keep this leaf in front of Hanumanji for some time and then write Sri Ram on it with saffron. After the puja keep the leaf in your purse. By doing this there is no shortage of funds throughout the year. Your wallet will be full of money.

 Note- The information and information given above is given for general purpose. We do not claim to check its veracity. This information has been taken from various media such as astrologers, scriptures, panchgas, etc. This user will have his own responsibility.

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राष्ट्र हिंदू धर्म में श्रीगणेश के अवतार By वनिता कासनियां पंजाब श्रीगणेश के अवतारहम सबने भगवान विष्णु के दशावतार और भगवान शंकर के १९ अवतारों के विषय में सुना है। किन्तु क्या आपको श्रीगणेश के अवतारों के विषय में पता है? वैसे तो श्रीगणेश के कई रूप और अवतार हैं किन्तु उनमें से आठ अवतार जिसे "अष्टरूप" कहते हैं, वो अधिक प्रसिद्ध हैं। इन आठ अवतारों की सबसे बड़ी विशेषता ये है कि इन्ही सभी अवतारों में श्रीगणेश ने अपने शत्रुओं का वध नहीं किया बल्कि उनके प्रताप से वे सभी स्वतः उनके भक्त हो गए। आइये उसके विषय में कुछ जानते हैं।वक्रतुंड: मत्स्यरासुर नामक एक राक्षस था जो महादेव का बड़ा भक्त था। उसने भगवान शंकर की तपस्या कर ये वरदान प्राप्त किया कि उसे किसी का भय ना हो। वरदान पाने के बाद मत्सरासुर ने देवताओं को प्रताडि़त करना शुरू कर दिया। उसके दो पुत्र थे - सुंदरप्रिय और विषयप्रिय जो अपने पिता के समान ही अत्याचारी थे। उनके अत्याचार से तंग आकर सभी देवता महादेव की शरण में पहुंचे। शिवजी ने उन्हें श्रीगणेश का आह्वान करने को कहा। देवताओं की आराधना पर श्रीगणेश ने विकट सूंड वाले "वक्रतुंड" अवतार लिया और मत्सरासुर को ललकारा। अपने पिता की रक्षा के लिए सुंदरप्रिय और विषप्रिय दोनों ने उनपर आक्रमण किया किन्तु श्रीगणेश ने उन्हें तत्काल अपनी सूंड में लपेट कर मार डाला। ये देख कर मत्सरासुर ने अपनी पराजय स्वीकार की और श्रीगणेश का भक्त बन गया।एकदंत: एक बार महर्षि च्यवन को एक पुत्र की इच्छा हुई तो उन्होंने अपने तपोबल से मद नाम के राक्षस की रचना की। वह च्यवन का पुत्र कहलाया। मद ने दैत्यगुरु शुक्राचार्य से शिक्षा ली और हर प्रकार की विद्या और युद्धकला में निपुण बन गया। अपनी सिद्धियों के बल पर उसने देवताओं का विरोध शुरू कर दिया और सभी देवता उससे प्रताडि़त रहने लगे। सभी देवों ने एक स्वर में श्रीगणेश को पुकारा। इनकी रक्षा के लिए तब वे "एकदंत" के रूप में प्रकट हुए। उनकी चार भुजाएं और एक दांत था। वे चतुर्भुज रूप में थे जिनके हाथ में पाश, परशु, अंकुश और कमल था। एकदंत ने देवताओं को अभय का वरदान दिया और मदासुर को युद्ध में पराजित किया।महोदर: जब कार्तिकेय जी ने तारकासुर का वध कर दिया तो दैत्य गुरु शुक्राचार्य ने मोहासुर नाम के दैत्य को देवताओं के विरुद्ध खड़ा किया। वे अनेक अस्त्र-शस्त्रों का ज्ञाता था और उसका शरीर बहुत विशाल था। उसकी शक्ति की भी कोई सीमा नहीं थी। जब उस विकट रूप में मोहासुर देवताओं के सामने पहुंचा तो वे भयभीत हो गए। तब देवताओं की रक्षा के लिए श्रीगणेश ने "महोदर" अवतार लिया। उस रूप में उनका उदर अर्थात पेट इतना बड़ा था कि उसने आकाश को आच्छादित कर दिया। जब वे मोहासुर के समक्ष पहुंचे तो उनका वो अद्भुत रूप देख कर मोहासुर ने बिना युद्ध के ही आत्मसमर्पण कर दिया। उसके बाद उसने देव महोदर को ही अपना इष्ट बना लिया।विकट: जालंधर और वृंदा की कथा तो हम सभी जानते हैं। जब श्रीहरि ने जालंधर के विनाश हेतु उसकी पत्नी वृंदा का सतीत्व भंग किया तो महादेव ने जालंधर का वध कर दिया। तत्पश्चात वृंदा ने आत्मदाह कर लिया और उन्ही के क्रोध से कामासुर का एक महापराक्रमी दैत्य उत्पन्न हुआ। उसने महादेव से कई अवतार प्राप्त कर त्रिलोक पर अधिकार जमा लिया। त्रिलोक को त्रस्त जान कर श्रीगणेश ने "विकट" रूप में अवतार लिया और अपने उस अवतार में उन्होंने अपने बड़े भाई कार्तिकेय के मयूर को अपना वाहन बनाया। उसके बाद उन्होंने कामासुर को घोर युद्ध कर उसे पराजित किया और देवताओं को निष्कंटक किया। बाद में कामासुर श्रीगणेश का भक्त बन गया। गजानन: एक बार धनपति कुबेर को अपने धन पर अहंकार और लोभ हो गया। उनके लोभ से लोभासुर नाम के असुर का जन्म हुआ। मार्गदर्शन के लिए वो शुक्राचार्य की शरण में गया। शुक्राचार्य ने उसे महादेव की तपस्या करने का आदेश दिया। उसने भोलेनाथ की घोर तपस्या की जिसके बाद महादेव ने उसे त्रिलोक विजय का वरदान दे दिया। उस वरदान के मद में लोभासुर स्वर्ग, पृथ्वी और पाताल का अधिपति हो गया। सारे देवता स्वर्ग से हाथ धोकर अपने गुरु बृहस्पति के पास गए। देवगुरु ने उन्हें श्रीगणेश की तपस्या करने को कहा। देवराज इंद्र के साथ सभी देवों ने श्रीगणेश की तपस्या की जिससे श्रीगणेश प्रसन्न हुए और उन्होंने देवताओं को आश्वासन दिया कि वे अवश्य उनका उद्धार करेंगे। गणेशजी "गजानन" रूप में पृथ्वी पर आये और अपने मूषक द्वारा लोभासुर को युद्ध का सन्देश भेजा। जब शुक्राचार्य ने जाना कि गजानन स्वयं आये हैं तो लोभासुर की पराजय निश्चित जान कर उन्होंने उसे श्रीगणेश की शरण में जाने का उपदेश दिया। अपनी गुरु की बात सुनकर लोभासुर ने बिना युद्ध किए ही अपनी पराजय स्वीकार कर ली और उनका भक्त बन गया।लंबोदर: क्रोधासुर नाम नाम का एक दैत्य था जो अजेय बनना चाहता था। उसने इसी इच्छा से भगवान सूर्यनारायण की तपस्या की और उनसे ब्रह्माण्ड विजय का वरदान प्राप्त कर लिया। वरदान प्राप्त करने के बाद क्रोधासुर विश्वविजय के अभियान पर निकला। उसे स्वर्ग की ओर आते देख इंद्र और सभी देवता भयभीत हो गए। उन्होंने श्रीगणेश से प्रार्थना की कि वो किसी भी प्रकार क्रोधासुर को स्वर्ग पहुँचने से रोकें। तब वे "लम्बोदर" का रूप लेकर क्रोधासुर के पास आये और उसे समझाया कि वो कभी भी अजेय नहीं बन सकता। इस पर क्रोधासुर उनकी बात ना मान कर स्वर्ग की ओर बढ़ने लगा। ये देख कर श्रीगणेश ने अपने उदर (पेट) द्वारा उस मार्ग को बंद कर दिया। ये देख कर क्रोधासुर दूसरे मार्ग की ओर मुड़ा। तब लम्बोदर रुपी श्रीगणेश ने अपने उदर को विस्तृत कर वो मार्ग भी रुद्ध कर दिया। क्रोधासुर जिस भी मार्ग पर जाता, श्रीगणेश अपने उदर से उस मार्ग को बंद कर देते। ये देख कर क्रोधासुर का अभिमान समाप्त हुआ और वो श्रीगणेश का भक्त बन गया। उनके आदेश पर उसने अपना युद्ध अभियान बंद कर दिया और पाताल में जाकर बस गया।विघ्नराज: एक बार माता पार्वती कैलाश पर अपनी सखियों के साथ बातचीत कर रही थी। उसी दौरान वे जोर से हंस पड़ीं। उनकी हंसी से एक विशाल पुरुष की उत्पत्ति हुई। चूँकि उसका जन्म माता पार्वती के ममता भाव से हुआ था इसीलिए उन्होंने उसका नाम मम रखा। बाद में मम देवी पार्वती की आज्ञा से वन में तपस्या करने चला गया। वही वो असुरराज शंबरासुर से मिला। उसे योग्य जान कर शम्बरासुर ने उसे कई प्रकार की आसुरी शक्तियां सिखा दीं। बाद में शम्बरासुर ने मम को श्री गणेश की उपासना करने को कहा। मम ने गणपति को प्रसन्न कर अपार शक्ति का स्वामी बन गया। तप पूर्ण होने के बाद शम्बरासुर ने उसका विवाह अपनी पुत्री मोहिनी के साथ कर दिया। जब दैत्यगुरु शुक्राचार्य ने मम के तप के बारे में सुना तो उन्होंने उसे दैत्यराज के पद पर विभूषित कर दिया। अपने बल के मद में आकर ममासुर ने देवताओं पर आक्रमण किया और उन्हें परास्त कर कारागार में डाल दिया। तब उसी कारावास में देवताओं ने गणेश की उपासना की जिससे प्रसन्न हो श्रीगणेश "विघ्नराज" (विघ्नेश्वर) के रूप में अवतरित हुए। उन्होंने ममासुर को युद्ध के लिए ललकारा और उसे परास्त कर उसका मान मर्दन किया। अंततः ममासुर उनकी शरण में आ गया। तत्पश्चात उन्होंने देवताओं को मुक्त कर उनके विघ्न का नाश किया। धूम्रवर्ण: एक बार भगवान सूर्यनारायण को छींक आ गई और उनकी छींक से एक दैत्य की उत्पत्ति हुई। उस दैत्य का नाम उन्होंने अहम रखा। उसने दैत्यगुरु शुक्राचार्य से शिक्षा ली और अहंतासुर नाम से प्रसिद्ध हुआ। बाद में उसने अपना स्वयं का राज्य बसाया और तप कर श्रीगणेश को प्रसन्न किया। उनसे उसे अनेकानेक वरदान प्राप्त हुए। वरदान प्राप्त कर वो निरंकुश हो गया और बहुत अत्याचार और अनाचार फैलाया। तब उसे रोकने के लिए श्री गणेश ने धुंए के रंग वाले रूप में अवतार लिया और उसी कारण उनका नाम "धूम्रवर्ण" पड़ा। उनके हाथ में एक दुर्जय पाश था जिससे सदैव ज्वालाएं निकलती रहती थीं। धूम्रवर्ण के रुप में गणेश जी ने अहंतासुर को उस पाश से जकड लिया। अहम् ने उस पाश से छूटने का बड़ा प्रयास किया किन्तु सफल नहीं हुआ। अंत में उसने अपनी पराजय स्वीकार कर ली और देव धूम्रवर्ण की शरण में आ गया। तब उन्होंने अहंतासुर को अपनी अनंत भक्ति प्रदान की।

राष्ट्र हिंदू धर्म में श्रीगणेश के अवतार By  वनिता कासनियां पंजाब हम सबने भगवान विष्णु के  दशावतार  और  भगवान शंकर के १९ अवतारों  के विषय में सुना है। किन्तु क्या आपको श्रीगणेश के अवतारों के विषय में पता है? वैसे तो श्रीगणेश के कई रूप और अवतार हैं किन्तु उनमें से आठ अवतार जिसे  "अष्टरूप"  कहते हैं, वो अधिक प्रसिद्ध हैं। इन आठ अवतारों की सबसे बड़ी विशेषता ये है कि इन्ही सभी अवतारों में श्रीगणेश ने अपने शत्रुओं का वध नहीं किया बल्कि उनके प्रताप से वे सभी स्वतः उनके भक्त हो गए। आइये उसके विषय में कुछ जानते हैं। वक्रतुंड:  मत्स्यरासुर नामक एक राक्षस था जो महादेव का बड़ा भक्त था। उसने भगवान शंकर की तपस्या कर ये वरदान प्राप्त किया कि उसे किसी का भय ना हो। वरदान पाने के बाद मत्सरासुर ने देवताओं को प्रताडि़त करना शुरू कर दिया। उसके दो पुत्र थे - सुंदरप्रिय और विषयप्रिय जो अपने पिता के समान ही अत्याचारी थे। उनके अत्याचार से तंग आकर सभी देवता महादेव की शरण में पहुंचे। शिवजी ने उन्हें श्रीगणेश का आह्वान करने को कहा। देवताओं की आराधना पर श्रीगणेश ने विकट सूंड व...

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